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ओबीसी कोटे में तय सीमा से ज्यादा दिव्यांग नियुक्तियां अवैध
21-May-2026 12:15 PM
ओबीसी कोटे में तय सीमा से ज्यादा दिव्यांग नियुक्तियां अवैध

90 दिन में नई मेरिट सूची बनाने के आदेश दिया हाईकोर्ट ने

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 21 मई। छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी अनियमितताओं को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि केवल मेरिट के आधार पर दिव्यांग अभ्यर्थियों को अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षित पदों पर निर्धारित सीमा से अधिक नियुक्त करना कानूनन सही नहीं है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को वर्तमान मेरिट सूची की समीक्षा कर 90 दिनों के भीतर संशोधित सूची तैयार करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने यह आदेश उमेश कुमार श्रीवास, नेहा साहू, प्रमोद कुमार साहू और अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय ने 9 मार्च 2019 को व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। ओबीसी वर्ग से आने वाले याचिकाकर्ताओं ने भी भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लिया और मेरिट सूची में स्थान प्राप्त किया था।

राज्य सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि चयनित दिव्यांग अभ्यर्थियों ने मेरिट सूची में ऊंचा स्थान हासिल किया था। संबंधित परिपत्र और उनकी योग्यता के आधार पर उन्हें उनकी मूल सामाजिक श्रेणी की परवाह किए बिना नियुक्ति दी गई।

वहीं याचिकाकर्ताओं ने तर्क रखा कि चयन समिति द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक इंदिरा साहनी फैसले के विपरीत है।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि चयन समिति की अपनाई गई प्रक्रिया मूल रूप से त्रुटिपूर्ण है। इससे सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को समान अवसर नहीं मिल पाता। अदालत ने स्पष्ट किया कि दिव्यांग अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ देते समय आरक्षण नियमों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी और राजेश कुमार दरिया मामलों का हवाला देते हुए सामाजिक और विशेष आरक्षण के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। अदालत ने कहा कि वर्टिकल रिजर्वेशन में यदि एससी, एसटी या ओबीसी वर्ग का उम्मीदवार मेरिट के आधार पर सामान्य सीट हासिल करता है, तो उसे कोटे में नहीं गिना जाता। लेकिन हॉरिजॉन्टल रिजर्वेशन यानी दिव्यांग और महिला आरक्षण के मामलों में चयनित उम्मीदवार को उसकी मूल सामाजिक श्रेणी के कोटे में ही समायोजित किया जाता है। अब राज्य सरकार को पूरी चयन सूची की दोबारा समीक्षा कर नई मेरिट सूची जारी करनी होगी।


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