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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
जांजगीर-चांपा, 20 मई। चेक बाउंस मामले में लगातार गैरहाजिर रहने, अदालत के सामने भ्रामक तथ्य रखने और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग नहीं करने पर जांजगीर की अदालत ने एक रेलवे कर्मचारी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। कोर्ट ने माना कि आरोपी का रवैया सुनवाई को लगातार टालने वाला रहा है और इससे अदालत का समय भी बर्बाद हो रहा था।
मामला वर्ष 2020 में दायर एक परिवाद का है। परिवादी मुकेश राठौर ने जांजगीर निवासी सरोज कुमार धीवर, पिता सीताराम धीवर, वार्ड क्रमांक-4 के खिलाफ परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, जांजगीर में शिकायत प्रस्तुत की थी। इसके बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
आरोपी पहली बार 16 जनवरी 2023 को अदालत में पेश हुआ था। उस दौरान उसे नियमित रूप से सुनवाई में उपस्थित रहने की शर्त पर जमानत दी गई थी। बाद में भी उसे कई बार राहत दी गई, ताकि वह मामले की सुनवाई में सहयोग कर सके।
सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि आरोपी लगातार अनुपस्थित रहकर जानबूझकर मामले को लंबा खींच रहा है। यह भी बताया गया कि अदालत ने आरोपी को चेक राशि का 20 प्रतिशत जमा करने का निर्देश दिया था, लेकिन दो वर्षों से उसने यह राशि जमा नहीं की।
परिवादी पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी का व्यवहार यह दर्शाता है कि वह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है और मामले के निराकरण में कोई सहयोग नहीं करना चाहता।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी की बार-बार गैरहाजिरी के कारण पहले भी गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका था। इसके बावजूद जब मामला अंतिम बहस के चरण में पहुंचा तो आरोपी ने फिर से अनुपस्थित रहना शुरू कर दिया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जांजगीर ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी द्वारा आवेदन प्रस्तुत कर भ्रामक तथ्य रखे गए और सुनवाई को अनावश्यक रूप से प्रभावित किया गया। कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया।
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