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शिकायतकर्ता की गवाही भरोसेमंद नहीं, पशु चिकित्सा अधिकारी बरी
20-May-2026 11:34 AM
शिकायतकर्ता की गवाही भरोसेमंद नहीं, पशु चिकित्सा अधिकारी बरी

दूसरी शादी के लिए जीपीएफ एडवांस लेने की बात छिपाई, एसीबी जब्ती भी साबित नहीं कर सकी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 20 मई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रिश्वत लेने के आरोप में दोषी ठहराए गए पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. नारायण प्रसाद पांडेय को बरी कर दिया है। कोर्ट ने माना कि शिकायतकर्ता की गवाही भरोसेमंद नहीं है और एसीबी यह साबित नहीं कर सकी कि कथित रिश्वत की रकम सीधे आरोपी के हाथ से बरामद हुई थी।

हाईकोर्ट ने इस मामले में सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई पांच साल की सजा और जुर्माने के आदेश को भी निरस्त कर दिया।

डॉ. पांडेय उस समय बीजापुर में उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं के पद पर पदस्थ थे। उनके खिलाफ भैरमगढ़ अस्पताल में सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के रूप में कार्यरत गणेश राम प्रधान ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में कहा गया था कि उसने अपनी शादी के लिए 1.50 लाख रुपये के जीपीएफ एडवांस का आवेदन दिया था, जिसमें 1.32 लाख रुपये स्वीकृत हुए। आरोप था कि 12 जून 2014 को राशि जारी करते समय डॉ. पांडेय ने 10 हजार रुपये रिश्वत मांगी। इसके बाद 16 जून को एसीबी में शिकायत दी गई और 18 जून को ट्रैप कार्रवाई कर अधिकारी को गिरफ्तार किया गया।

बाद में सत्र न्यायालय ने उन्हें दोषी मानते हुए पांच वर्ष कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई।

अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने यह तथ्य छिपाया कि वह दूसरी शादी के लिए जीपीएफ एडवांस लेना चाहता था। अदालत ने टिप्पणी की कि पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करना सरकारी सेवक के लिए अपराध की श्रेणी में आता है।

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि डॉ. पांडेय ने पहले ही शिकायतकर्ता के खिलाफ बीजापुर कलेक्टर को शिकायत दी थी, जिसके आधार पर विभागीय जांच चल रही थी। ऐसे में शिकायतकर्ता की गवाही पूरी तरह विश्वसनीय नहीं मानी जा सकती।

अदालत ने एसीबी की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि एजेंसी यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि रकम आरोपी के हाथ से मिली थी या केवल टेबल पर रखी हुई थी। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी अधिकारी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।


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