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पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल सहित पांच राज्यों के चुनाव ख़त्म होते ही केंद्र सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की क़ीमत में 993 रुपये की अभूतपूर्व बढ़ोतरी कर दी है.
यह बढ़ोतरी लगभग 47.8 फ़ीसदी है. इससे पहले एक अप्रैल से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में 195.50 रुपये की बढ़ोत्तरी की गई थी.
ईरान युद्ध के बाद से एलपीजी की 'कमी' की शिकायतें और 'ब्लैक मार्केट' में सिलेंडर बिकने की खबरें पहले से थीं.
सरकार ने घरेलू सिलेंडर की बुकिंग अवधि 25 दिन कर दी, फिर भी समय पर सिलेंडर नहीं मिलने की शिकायतें जारी हैं.
अब इस आधिकारिक बढ़ोतरी के बाद 19 किलो के नीले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की क़ीमत दिल्ली में 3,071 रुपये हो गई है.
इसी तरह पांच किलो के छोटे सिलेंडर की क़ीमत भी 1 मई से 261 रुपये बढ़ा दी गई है.
हालांकि, घरेलू इस्तेमाल के 14.2 किलो वाले लाल एलपीजी सिलेंडर की क़ीमत नहीं बढ़ाई गई है.
इससे खाने-पीने का खर्च बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
यह बढ़ोतरी होटल, रेस्टोरेंट, हॉस्टल, कैटरिंग जैसे उद्योगों के लिए बड़ा झटका है, ख़ासकर उन जगहों पर जहां पाइप गैस यानी पीएनजी उपलब्ध नहीं है. वहां ऐसे उद्योगों की लागत में बढ़ोतरी की आशंका है.
घरेलू एयरलाइंस के ईंधन की क़ीमत नहीं बढ़ी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एटीएफ़ महंगा किया गया है.
होटल-रेस्टोरेंट समेत इन उद्योगों पर असर
यह बढ़ोतरी होटल, रेस्टोरेंट, हॉस्टल, कैटरिंग जैसे उद्योगों के लिए बड़ा झटका है, ख़ासकर उन जगहों पर जहां पाइप गैस यानी पीएनजी उपलब्ध नहीं है. वहां ऐसे उद्योगों की लागत में बढ़ोतरी की आशंका है.
बीबीसी गुजराती ने इन उद्योगों से जुड़े कुछ लोगों से बात की.
अहमदाबाद के कैटरिंग व्यवसायी गोरधनभाई पुरोहित ने कहा, "पहले से ही एलपीजी की भारी कमी थी, अब यह बढ़ोतरी चौंकाने वाली है. पहले खाने की लागत में करीब 30 फ़ीसदी हिस्सा ईंधन का होता था, अब यह और बढ़ जाएगा."
उन्होंने बताया कि पहले शादी-ब्याह में एक ही जगह खाना बनाकर परोसा जाता था, लेकिन अब हर जगह लाइव किचन का चलन है, जिससे हर डिश को गर्म रखने के लिए लगातार गैस का इस्तेमाल करना पड़ता है.
उन्होंने कहा, "अब जितनी डिश, उतने चूल्हे और सिलेंडर चाहिए. आउटडोर कार्यक्रमों में गैस पाइपलाइन नहीं होती, इसलिए इस बढ़ोतरी का बोझ आखिरकार ग्राहकों पर ही पड़ेगा."
अहमदाबाद के टीजीपी ग्रुप के चेयरमैन और होटल-रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र सोमानी ने कहा, "हाल में यह कमर्शियल एलपीजी की ये तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है. यह होटल और कैटरिंग उद्योग के लिए बड़ा झटका है."
उन्होंने कहा कि अभी भी गैस की कमी बनी हुई है और हालात सामान्य नहीं हुए हैं. ऐसे में संकट आगे और बढ़ने की आशंका है.
मज़दूर क्या बोले
सूरत में बीबीसी गुजराती को कुछ मज़दूरों बताया कि ब्लैक मार्केट में तीन गुना क़ीमत पर गैस खरीदना संभव नहीं था, इसलिए वे वापस जा रहे हैं.
अमेरिका और इसराइल से फ़रवरी के अंत में ईरान पर हमले के बाद से देश में एलपीजी सप्लाई की समस्या बनी हुई है.
दिल्ली और सूरत जैसे शहरों में लाखों मज़दूर गैस की कमी के कारण घर लौटने को मजबूर हुए हैं. कुछ लोग लकड़ी या कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं.
सूरत में चाय-नाश्ते की गाड़ी चलाने वाले मुकेश कुमार ने बताया, "मैं अब एलपीजी नहीं खरीद सकता, इसलिए दो महीने से कोयले का चूल्हा इस्तेमाल कर रहा हूं. हालांकि अब कोयला भी महंगा हो गया है."
सूरत में बीबीसी गुजराती को कुछ मज़दूरों बताया कि ब्लैक मार्केट में तीन गुना क़ीमत पर गैस खरीदना संभव नहीं था, इसलिए वे वापस जा रहे हैं.
अमेरिका और इसराइल से फ़रवरी के अंत में ईरान पर हमले के बाद से देश में एलपीजी सप्लाई की समस्या बनी हुई है.
दिल्ली और सूरत जैसे शहरों में लाखों मज़दूर गैस की कमी के कारण घर लौटने को मजबूर हुए हैं. कुछ लोग लकड़ी या कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं.
सूरत में चाय-नाश्ते की गाड़ी चलाने वाले मुकेश कुमार ने बताया, "मैं अब एलपीजी नहीं खरीद सकता, इसलिए दो महीने से कोयले का चूल्हा इस्तेमाल कर रहा हूं. हालांकि अब कोयला भी महंगा हो गया है."
अन्य उद्योगों पर असर
यह बढ़ोतरी गुजरात में छोटे होटल, रेस्टोरेंट और सड़क किनारे खाने-पीने का काम करने वालों पर बड़ा असर डालेगी, खासकर जहां पाइप गैस उपलब्ध नहीं है.
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (एनआरएआई) के गुजरात प्रमुख दिलीप ठक्कर ने कहा, "हमारे उद्योग के करीब 80 फ़ीसदी लोगों के पास पाइप गैस कनेक्शन है, लेकिन हॉस्टल, मंदिर, अस्पताल और आउटडोर कैटरिंग में अभी भी कमर्शियल एलपीजी का इस्तेमाल होता है."
उन्होंने कहा कि शादी के सीजन में इन सिलेंडरों की मांग और बढ़ जाती है, इसलिए खाने की क़ीमत बढ़ना लगभग तय है.
एक कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े व्यक्ति ने कहा, "सबसे बड़ी समस्या सप्लाई की है. सरकारी क़ीमत 3100 रुपये है, लेकिन ब्लैक मार्केट में यही सिलेंडर 6000-6500 रुपये में मिल रहा है."
सरकार और उद्योग की प्रतिक्रिया
सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने कहा, "घरेलू एलपीजी की क़ीमत नहीं बढ़ाई गई है, जिससे 33 करोड़ उपभोक्ता जुड़े हैं. कमर्शियल एलपीजी कुल खपत का एक फ़ीसदी से भी कम है. ''
दक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष निखिल मद्रासी ने कहा, "चुनाव के बाद ईंधन की क़ीमत बढ़ने की उम्मीद पहले से थी. उद्योग इसके लिए तैयार था."
उन्होंने चेतावनी दी कि टेक्सटाइल उद्योग में भी गैस का इस्तेमाल होता है, इसलिए लागत बढ़ने से भारी नुकसान हो सकता है.
उन्होंने कहा, "पहले से ही मज़दूरों की कमी और गैस सप्लाई की समस्या है. ऐसे में महंगी गैस के कारण कुछ उद्योग कर्ज चुकाने में भी डिफॉल्ट कर सकते हैं."
विपक्ष का सरकार पर निशाना
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की क़ीमतों में बढ़ोतरी के बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि यह 'अंतरराष्ट्रीय समस्या' है.
क़ीमतों में बढ़ोतरी के बाद प्रह्लाद जोशी ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, "हमारी एलपीजी की 50 फ़ीसदी से ज़्यादा ज़रूरत आयात पर निर्भर है. मुश्किलों के बावजूद मोदी सरकार ने पेट्रोल, डीज़ल, घरेलू एलपीजी और एलएनजी की क़ीमतें संभालकर रखी हैं."
उन्होंने आगे कहा, "लेकिन यह होना ही था क्योंकि कंपनियां बहुत नुकसान झेल रही हैं. इसी वजह से ऐसा (क़ीमतों में वृद्धि) हुआ."
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तंज कसते हुए एक्स पोस्ट लिखा, "पहला वार गैस पर और अगला वार पेट्रोल-डीज़ल पर."
डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलानगोवन ने कहा, "यह सरकार चुनाव ख़त्म होने का इंतज़ार कर रही थी. उन्होंने एलपीजी सिलेंडर की क़ीमतें बढ़ा दी हैं. इसका मतलब है कि ज़्यादातर होटल बंद करने पड़ेंगे, क्योंकि वे कमर्शियल एलपीजी पर चल रहे हैं और उनके पास बंद करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है."
उन्होंने कहा, "सरकार रूस से कच्चे तेल की खरीद क्यों रोक रही है? यही वजह है कि ऐसी स्थिति पैदा हो रही है. डीज़ल और पेट्रोल की क़ीमतों में भी बढ़ोतरी होगी."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित


