ताजा खबर

सरगुजा में अतिक्रमण पर बुलडोजर, तालाब की 57 डिसमिल जमीन कराई कब्जा मुक्त
02-May-2026 4:44 PM
सरगुजा में अतिक्रमण पर बुलडोजर, तालाब की 57 डिसमिल जमीन कराई कब्जा मुक्त

भूमाफियाओं की गुंडागर्दी व गाली-गलौज का वीडियो फैला, पुलिस तैनात
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
अंबिकापुर, 2 मई।
अंबिकापुर शहर के बस स्टैंड से लगे रिंगबांध तालाब की जमीन पर किए गए अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन और नगर निगम ने सख्त रुख अपनाते हुए शनिवार को कार्रवाई शुरू कर दी। जेसीबी मशीनों की मदद से तालाब में डाली गई मिट्टी को हटाया जा रहा है। इससे पहले प्रशासन ने तालाब पाटने की गतिविधियों पर रोक लगा दी थी।

जेसीबी मशीनों की मदद से तालाब में डाली गई मिट्टी को जब हटाया जा रहा था, इसी बीच कथित भू स्वामी सहित 4-5 भू माफिया मौके पर पहुंच गए और गाली-गलौज करते हुए सभी वाहनों को वहां से खदेड़ दिया, जब इसकी जानकारी निगम और प्रशासन को लगी तो मौके पर पुलिस टीम भेजा गया, तब तक कथित भू स्वामी और माफिया वहां से जा चुके थे। भूमाफियाओं की गुंडागर्दी व गाली-गलौज का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। प्रशासन ने पुन: मिट्टी हटाने का काम प्रारंभ कर दिया है।

गौरतलब है कि प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार रिंगबांध तालाब का कुल रकबा 6.25 एकड़ निस्तार भूमि के रूप में दर्ज है। आरोप है कि प्रभावशाली भू-माफिया ने तालाब के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इनमें से 57 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री जनवरी 2026 में आजाद इराकी के नाम कराई गई, जिसके बाद तालाब को पाटने का काम शुरू हो गया।

मामला सामने आने पर कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद अंबिकापुर तहसीलदार ने तत्काल प्रभाव से जमीन पाटने पर रोक लगा दी। यह मुद्दा नगर निगम की सामान्य सभा में भी उठाया गया था। निगम प्रशासन ने संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी कर निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए थे।

निगम आयुक्त डीएन कश्यप के निर्देश पर अब तालाब क्षेत्र से अवैध भराव हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही प्रशासन द्वारा पूरे तालाब का सीमांकन कराया जाएगा। सरगुजा कलेक्टर अजीत बसंत ने जिले के सभी तालाबों का सीमांकन कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं।

इस मामले में फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। समाजसेवी कैलाश मिश्रा का दावा है कि जमीन के मूल स्वामी की मृत्यु के बाद दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार किए गए, जिनमें वारिसों के नाम भी अलग-अलग दर्शाए गए हैं। इसी आधार पर रजिस्ट्री कराए जाने का आरोप है। मामला फिलहाल तहसील न्यायालय में विचाराधीन है।

शिकायतकर्ता पार्षद आलोक दुबे के अनुसार, संबंधित भूमि जलक्षेत्र है और पटवारी की रिपोर्ट में भी इसे स्पष्ट किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया कि स्थल पर करीब छह फीट तक पानी भरा हुआ था, बावजूद इसके भराव किया गया। रिंगबांध तालाब नगर निगम के 17 प्रमुख तालाबों की सूची में शामिल है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने दिशा-निर्देशों में जलभराव क्षेत्रों और तालाबों को पाटने या उनकी प्रकृति बदलने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। ऐसे में इस मामले में आगे कड़ी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है।
ReplyForward
Add reaction
 


अन्य पोस्ट