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सुप्रीम कोर्ट ने आज 15 साल की एक लड़की की 30 हफ्ते की गर्भावस्था को मेडिकल तरीके से समाप्त करने की अनुमति देने वाले अदालत के हालिया आदेश का पालन नहीं करने पर अवमानना नोटिस जारी किया है.
लाइव लॉ के मुताबिक, जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रधान सचिव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव और एम्स, नई दिल्ली के निदेशक को निर्देश दिया कि वे सोमवार, 4 मई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में मौजूद रहें.
अदालत ने संकेत दिया कि अगर तब तक आदेश का पालन नहीं किया गया, तो वह आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू कर देगी.
यह आदेश नाबालिग लड़की की मां द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर दिया गया.
जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “अगर वे सोमवार तक हमारे आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो वे अवमानना कार्यवाही में आगे के निर्देशों के लिए तैयार रहें. हमें किसी और बात से कोई लेना-देना नहीं है, सिवाय इसके कि इस कोर्ट के आदेश का पालन हो.”
“अगर वे सोमवार तक पालन नहीं करते हैं, तो हम आरोप तय करेंगे. आरोप तय करने से पहले हम उनकी बात सुनेंगे.”
यह अवमानना याचिका अदालत के 24 अप्रैल के उस आदेश से जुड़ी है, जिसमें एक नाबालिग की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति दी गई थी. यह गर्भावस्था सात महीने से अधिक की हो चुकी थी.
अदालत ने यह माना था कि किसी महिला को केवल इस आधार पर किसी अवांछित गर्भावस्था को जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता कि बच्चे के जन्म के बाद उसे गोद दिया जा सकता है.
अदालत ने कहा था कि गर्भवती महिला की पसंद ही सर्वोपरि होनी चाहिए. (bbc.com/hindi)


