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वन मंत्री का आरोप
रायपुर, 30 अप्रैल। प्रदेश के वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने मजदूर दिवस पर बोरे-बासी खाने से जुड़े प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कांग्रेस विलायती रीति-नीति को महत्व देती है, तभी तो मजदूर दिवस के दिन कांग्रेस के नेताओं ने कांग्रेस शासन काल में मजदूर दिवस के दिन बोरे-बासी खाने के नाम पर 8 करोड रुपए का घोटाला कर डाला। श्री कश्यप ने कहा कि कांग्रेस ने जन-धन की लूट के लिए कोई दिन नहीं छोड़ा। आपदा को अवसर में बदलने वाली कांग्रेस पार्टी को छत्तीसगढ़ की पारंपरिक धरोहर एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों से कोई सरोकार नहीं है, उन्हें तो केवल प्रदेश एवं देश की जनता को केवल लूटना और भ्रमित करना है।
कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ की परम्परा एवं धरोहर को बचाने व सजाने का काम भाजपा सरकार ने किया। डॉ रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को एवं छत्तीसगढ़ी परम्परा को आगे बढ़ाने का काम भाजपा की सरकार ने किया। लेकिन जब जनता ने कांग्रेस को प्रदेश में सत्ता की बागडोर सौंपी तो कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ी परम्पराओं को ताक पर रखकर केवल लूट मचाने का काम किया। बोरे-बासी खाने के लिए मजदूर दिवस पर 8 करोड़ रुपए का घोटाला कर डाला। प्रदेश में पुनः भाजपा की सरकार बनते ही छत्तीसगढ़ी परम्पराओं को फिर से महत्व मिला और मजदूरों को सम्मान मिला। श्री कश्यप ने बैज के बयान को छत्तीसगढ़िया अस्मिता का अपमान और राजनीतिक ढोंग का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि कांग्रेस पांच वर्षों तक सत्ता में रहकर 'बोरे-बासी' के नाम पर केवल इवेंट मैनेजमेंट और करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार करती रही। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार की धारा प्रवाहित करने वाली छत्तीसगढ़ की जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने वाली कांग्रेस बोरे-बासी खाने के नाम पर केवल ढोंग कर रही है।
वन मंत्री कश्यप ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में बोरे-बासी को केवल एक विज्ञापनी हथियार बनाया गया। संस्कृति के संरक्षण के नाम पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए के विज्ञापन जारी किए गए, लेकिन धरातल पर मजदूर और किसान बदहाल ही रहे। बोरे-बासी तिहार के आयोजन के नाम पर जो फिजूलखर्ची और बंदरबाँट हुई, वह छत्तीसगढ़ की गरीब जनता के साथ क्रूर मजाक था। बैज को बताना चाहिए कि जिस संस्कृति का वे आज राग अलाप रहे हैं, उसी के नाम पर उनके आकाओं ने छत्तीसगढ़ को भ्रष्टाचार का गढ़ क्यों बना दिया था? भाजपा को संस्कृति विरोधी बताए जाने पर श्री कश्यप ने कहा कि भाजपा के लिए छत्तीसगढ़ी संस्कृति 'वोट बैंक' नहीं, बल्कि जीवन की पद्धति है। प्रदेश की जनता कांग्रेस के दोमुँहेपन और 'सांस्कृतिक पाखंड' को पहचान चुकी है।


