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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 23 अप्रैल। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान, सिम्स में एक बार फिर डॉक्टरों की तत्परता और आधुनिक चिकित्सा तकनीक का उदाहरण देखने को मिला। पांच वर्षीय बच्चे नितिन सिंह की जान समय रहते बचा ली गई, जब उसके गले में फंसा 5 रुपये का सिक्का एंडोस्कोपिक तकनीक से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
चिरमिरी जिले के धवलपुर निवासी नितिन सोमवार शाम करीब 7 बजे खेलते समय गलती से 5 रुपये का सिक्का निगल गया। सिक्का गले में फंसते ही बच्चे को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी और उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। परिजन तुरंत उसे सिम्स लेकर पहुंचे, जहां बिना देरी इलाज शुरू किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए परिजनों ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को जानकारी दी। मंत्री ने तत्काल सिम्स के डीन रमणेश मूर्ति को फोन कर बच्चे के इलाज को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
डीन के मार्गदर्शन में ईएनटी विभाग की प्रमुख डॉ. आरती पांडे के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम बनाई गई, जिसमें डॉ. विद्या भूषण साहू, डॉ. श्वेता मित्तल, डॉ. तन्मय गौतम और डॉ. बारसे महादेव शामिल थे। वहीं एनेस्थीसिया विभाग की प्रमुख डॉ. मधुमिता मूर्ति के निर्देशन में डॉ. यशा तिवारी और डॉ. बलदेव नेताम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बच्चे को तुरंत ऑपरेशन थिएटर ले जाकर एंडोस्कोपिक तकनीक से बिना किसी बड़े चीरे के सिक्का बाहर निकाला गया। इस दौरान एनेस्थीसिया टीम ने लगातार बच्चे की सांस और अन्य महत्वपूर्ण संकेतों पर निगरानी रखी। डॉक्टरों की सटीक तकनीक और तालमेल से यह जटिल प्रक्रिया बेहद कम समय में सफलतापूर्वक पूरी हुई।
ऑपरेशन के बाद बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है और डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
डीन डॉ. रमनेश मूर्ति ने बताया कि समय पर हस्तक्षेप और उन्नत उपकरणों की उपलब्धता के कारण बिना किसी जटिलता के यह प्रक्रिया संभव हो पाई। वहीं मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. लखन सिंह ने इसे मजबूत टीमवर्क और त्वरित निर्णय क्षमता का परिणाम बताया। सिम्स केवल सरकारी अस्पताल नहीं, बल्कि गंभीर से गंभीर आपात स्थितियों में भरोसे का मजबूत केंद्र है। भावुक परिजनों ने डॉक्टरों और स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि उनके बच्चे को नई जिंदगी मिली है।


