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अपीलीय प्राधिकरण का गठन नहीं होने कारण नहीं मिल सकती पूरी छूट
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 23 अप्रैल। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जीएसटी बकाया वसूली से जुड़े एक मामले में याचिकाकर्ता को सशर्त राहत देते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दायर याचिका में राज्य कर विभाग की ओर से जारी आदेशों और कुर्की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता मां काली इंडस्ट्रीज ने 4 नवंबर 2022 और 28 मार्च 2024 के आदेशों के साथ 16 जनवरी 2026 के अटैचमेंट नोटिस को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने 11 जुलाई 2024 को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी सर्कुलर का उल्लेख किया। इसमें स्पष्ट किया गया है कि जब तक जीएसटी अपीलीय अधिकरण का गठन नहीं हो जाता, तब तक अपील करना चाहने वाले करदाताओं को राहत दी जा सकती है, बशर्ते वे निर्धारित प्री-डिपॉजिट जमा करें और अंडरटेकिंग प्रस्तुत करें।
साथ ही 17 सितंबर 2025 की अधिसूचना का हवाला देते हुए बताया गया कि अपील दायर करने की समय-सीमा 30 जून 2026 तक बढ़ाई गई है।
न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने कहा कि इस मामले में और अधिक न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट दिशा-निर्देश दे चुकी है। अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अंडरटेकिंग देने की छूट दी, जिसमें यह उल्लेख होगा कि ट्रिब्यूनल के गठन के बाद वह अपील दाखिल करेगा। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि जीएसटी कानून के तहत निर्धारित प्री-डिपॉजिट की राशि 15 दिनों के भीतर जमा करनी होगी।
अदालत ने साफ कहा कि यदि याचिकाकर्ता तय समय में प्री-डिपॉजिट जमा कर देता है और अंडरटेकिंग प्रस्तुत करता है, तो शेष बकाया की वसूली पर रोक लगा दी जाएगी।
हालांकि, यदि निर्धारित समय सीमा में राशि जमा नहीं की जाती, तो यह राहत स्वतः समाप्त हो जाएगी और विभाग को वसूली की कार्रवाई आगे बढ़ाने की पूरी स्वतंत्रता होगी।


