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मातहत ने इंटरव्यू लेकर बॉस को बना दिया मुख्य सूचना आयुक्त
16-Apr-2026 2:42 PM
मातहत ने इंटरव्यू लेकर बॉस को बना दिया मुख्य सूचना आयुक्त

हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में सरकार से मांगा जवाब
'छत्तीसगढ़' संवाददाता

बिलासपुर, 16 अप्रैल। छत्तीसगढ़ में मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मामले में प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

याचिका राजनांदगांव निवासी प्रदीप शर्मा की ओर से दायर की गई है, जिसमें चयन प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अली असगर ने कोर्ट को बताया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और निष्पक्षता के मानकों पर खरा नहीं उतरती।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यह तर्क रखा गया कि एक उम्मीदवार, जो उस समय छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव पद पर कार्यरत था, उसका साक्षात्कार उसके ही अधीनस्थ अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा लिया गया। इसे प्रशासनिक दृष्टि से अनुचित बताया गया है।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि तमिलनाडु जैसे राज्यों में चयन समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज को सौंपी जाती है, जबकि छत्तीसगढ़ में समिति के सभी सदस्य नौकरशाह थे। इससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

इसके अलावा, आरोप है कि वर्ष 2024 में जिन दो अभ्यर्थियों को पहले अयोग्य घोषित किया गया था, उन्हें महज छह माह के भीतर योग्य घोषित कर चयनित कर लिया गया। इस बदलाव के पीछे स्पष्ट कारणों का अभाव भी विवाद का विषय बना हुआ है।

याचिका में यह भी कहा गया कि चयन के लिए अंक आधारित प्रणाली के बजाय ए, बी, सी ग्रेडिंग सिस्टम अपनाया गया, जिसमें अनुभव और साक्षात्कार के मूल्यांकन के लिए कोई स्पष्ट मानदंड निर्धारित नहीं था। इससे योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर नहीं मिल पाया।

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने पक्ष रखा। अब अदालत ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है, जिसके बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।


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