ताजा खबर
तीन महीने में योग्य अभ्यर्थियों का परिणाम जारी करने का निर्देश दिया हाईकोर्ट ने
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 29 अप्रैल। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एफसीआई की वर्ष 2017 की चौकीदार भर्ती प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने भर्ती निरस्त करने के आदेश को असंवैधानिक और मनमाना बताते हुए खारिज कर दिया है। साथ ही, भारतीय खाद्य निगम को निर्देश दिया है कि संदिग्ध अभ्यर्थियों को अलग करते हुए शेष योग्य उम्मीदवारों का परिणाम तीन महीने के भीतर घोषित किया जाए।
न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने स्पष्ट कहा कि यदि अनियमितता में शामिल अभ्यर्थियों की पहचान संभव है, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द करना न्यायसंगत नहीं है। ऐसा करना उन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है, जिन्होंने मेहनत से परीक्षा उत्तीर्ण की।
एफसीआई ने अगस्त 2017 में छत्तीसगढ़ में 114 चौकीदार पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। 24 सितंबर 2017 को लिखित परीक्षा और अगस्त 2018 में रायपुर में शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित हुई। इन चरणों के बाद 160 अभ्यर्थी सफल घोषित हुए, लेकिन अंतिम प्रक्रिया में 47 उम्मीदवारों के हस्ताक्षरों में गड़बड़ी पाई गई।
इसके बाद मामला जांच के नाम पर वर्षों तक लंबित रहा। 2018 से 2022 के बीच फोरेंसिक जांच चलती रही और अंततः 12 जनवरी 2023 को एफसीआई ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया।
इस निर्णय के खिलाफ मनीष कुमार यादव, खेम प्रसाद, लक्ष्मीकांत दुबे, निलेश सिंह सहित अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि किन अभ्यर्थियों के हस्ताक्षर संदिग्ध हैं और कौन सही हैं। ऐसे में दोषियों को अलग कर शेष चयन प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।


