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नगर-निगम का प्लास्टिक जब्ती अभियान विवादों में, मेयर पति ने लगाया टीम पर अवैध वसूली का आरोप
29-Apr-2026 12:17 PM
नगर-निगम का प्लास्टिक जब्ती अभियान विवादों में, मेयर पति ने लगाया टीम पर अवैध वसूली का आरोप

पेट्रोलिंग टीम ने थाने में की शिकायत

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 29 अप्रैल। बिलासपुर नगर निगम की प्रतिबंधित प्लास्टिक डिस्पोजेबल के खिलाफ कार्रवाई ने देवरीखुर्द के वार्ड-43 स्थित बुटापारा में मिश्रा प्रोविजन स्टोर पर हुई कार्रवाई के बाद तूल पकड़ गया है। एक ओर निगम की स्वच्छता पेट्रोलिंग टीम ने मेयर के पति अशोक विधानी पर हस्तक्षेप और धमकी देने का आरोप लगाया है, वहीं दुकानदार संदीप मिश्रा ने टीम पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए हैं।

स्वच्छता पेट्रोलिंग टीम के प्रभारी दीपक कुमार पंकज के अनुसार 27 अप्रैल की शाम टीम ने दुकान पर छापेमारी कर करीब 92 किलो प्रतिबंधित प्लास्टिक डिस्पोजेबल जब्त किए और जुर्माना लगाया। उनका कहना है कि कार्रवाई के दौरान मेयर के पति का फोन आया, जिसमें उन्होंने दबाव बनाते हुए अभद्र व्यवहार किया और कार्रवाई रोकने की कोशिश की।

दूसरी तरफ दुकानदार संदीप मिश्रा का आरोप है कि टीम ने पहुंचते ही 20 हजार रुपए की मांग की। रकम न देने पर सामान जब्त करने की धमकी दी गई। मिश्रा के मुताबिक, अंततः 7 हजार रुपए लिए गए, लेकिन कोई रसीद नहीं दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टीम के सदस्य दुकान में बैठकर कोल्ड ड्रिंक और सिगरेट का सेवन करते रहे। मिश्रा का दावा है कि पूरे घटनाक्रम का सीसीटीवी फुटेज उनके पास मौजूद है। 28 अप्रैल को जब पेट्रोलिंग टीम फिर दुकान पहुंची और 7 हजार रुपए की बैक डेट में रसीद थमा दी। इसी दौरान अशोक विधानी भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों के सामने विरोध दर्ज कराया।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम की सामान्य सभा में पहले भी स्वच्छता पेट्रोलिंग टीम पर अवैध वसूली के आरोप लग चुके हैं। सभापति विनोद सोनी ने सदन में कहा था कि शहरभर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं और जनप्रतिनिधियों के फोन के बावजूद कार्रवाई नहीं रुकती।

इसके अलावा टीम की कार्रवाई के तरीके पर भी सवाल हैं। आरोप है कि प्रतिबंधित प्लास्टिक की पहचान के लिए न तो पर्यावरण विशेषज्ञ साथ रहते हैं और न ही तकनीकी जांच की कोई व्यवस्था होती है। कार्रवाई भी ज्यादातर छोटे दुकानदारों तक सीमित रहती है।

अशोक विधानी का कहना है कि उन्हें अवैध वसूली की सूचना मिली थी, जिस पर उन्होंने टीम को नियम अनुसार केवल जुर्माना लगाने की बात कही, लेकिन इसके बावजूद पैसे लिए गए और बाद में रसीद जारी की गई।

वहीं टीम प्रभारी दीपक कुमार पंकज ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विधानी ने न सिर्फ कार्रवाई में बाधा डाली बल्कि अभद्र भाषा का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 7 हजार रुपए की रसीद उसी दिन दी गई थी, जबकि सामान जब्त नहीं किया जा सका क्योंकि टीम के पास परिवहन की सुविधा नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि अब तक टीम करीब 15 लाख रुपए का जुर्माना वसूल चुकी है।


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