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नयी दिल्ली, 16 फरवरी। सरकार के शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार ने सोमवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एक दोधारी तलवार है, और शासन का उद्देश्य अवसरों को अधिक प्रभावी बनाते हुए जोखिमों को कम करना होना चाहिए।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने राष्ट्रीय राजधानी में कहा, “डिजिटल पहुंच में वृद्धि हुई है, और बच्चे एआई-संचालित मंचों के संपर्क में अधिकाधिक आ रहे हैं। एआई साथियों, वैयक्तिकृत शिक्षण ऐप्स, एल्गोरिदम-संचालित फ़ीड और सिंथेटिक मीडिया के साथ बड़े होने के दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में हम अभी पूरी तरह से नहीं जानते हैं।”
सिंथेटिक मीडिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग का उपयोग करके निर्मित या हेरफेर की गई डिजिटल सामग्री है।
उन्होंने यह भी कहा कि समय के साथ ये उपकरण बच्चे के विकास, मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा को कैसे प्रभावित करते हैं, इसे समझने के लिए और अधिक साक्ष्य की आवश्यकता है।
राजधानी में हो रहे ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ के एक सत्र में उन्होंने उल्लेख किया कि सीखने के उपकरणों, कंटेंट प्लेटफॉर्म और विभिन्न मॉडलों के माध्यम से एआई का बच्चों के दैनिक जीवन में अधिक दखल है।
सूद ने कहा कि इससे यह सुनिश्चित करने की शासन की जिम्मेदारी बनती है कि बच्चे एआई की सीखने और समावेशन की क्षमता से लाभान्वित हो सकें, साथ ही उन्हें उन खतरों से भी सुरक्षित रखा जाए जो डिजिटल वातावरण में तेजी से बढ़ सकते हैं।
यह सत्र ‘एआई और बच्चे: सुरक्षित, समावेशी और सशक्त एआई के लिए सिद्धांतों को व्यवहार में लाना’ विषय पर था।
उन्होंने कहा,“एआई एक दोधारी तलवार है। शासन का उद्देश्य अवसरों को और अधिक प्रभावी बनाना और जोखिमों को कम करना होना चाहिए।” (भाषा)


