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रायपुर, 16 फरवरी। नेत्र विशेषज्ञ और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने हाल में जमशेदपुर के सिगमेडा, गोविंदपुर और बिस्टुपुर इलाकों में सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और युवाओं से संवाद कर तथा व्याख्यान दिए।
डॉ. मिश्र ने कार्यक्रम में कहा कि झारखंड में डायन के संदेह में महिलाओं के साथ क्रूरता के कई मामले सामने आते हैं। आरटीआई और अन्य स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य के 24 जिलों में डायन प्रथा से जुड़े 7 हजार से अधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें 1,800 से ज्यादा महिलाओं की हत्या हो चुकी है। गढ़वा जिले में 795, पलामू में 299, हजारीबाग में 287 और रांची में 112 जैसे मामले सबसे ज्यादा हैं।
उन्होंने बताया कि ऐसी घटनाएं गरीब, विधवा, परित्यक्ता और बेसहारा महिलाओं के साथ ज्यादा होती हैं, खासकर 40 से 60 साल की उम्र की महिलाओं के साथ। प्रताड़ना के तरीके बेहद क्रूर होते हैं, जैसे जिंदा जलाना, गला काटना, पत्थरों-डंडों से पीटना, बाल काटना, मुंह काला करना, दांत तोड़ना या आंख फोड़ना जैसी अमानवीय हरकतें की जाती हैं। कई मामलों में पीड़ित महिलाओं को अस्पताल तक नहीं ले जाया जाता और वे घटनास्थल पर ही मर जाती हैं। एक पीड़िता ने सालों तक घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था और डर के मारे सामान्य जीवन जीने में मुश्किल हुई।
डॉ. मिश्र ने कहा कि देश के 17 राज्यों में यह समस्या फैली हुई है, जिसमें झारखंड, बिहार, ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़, राजस्थान और हरियाणा प्रमुख हैं।
डॉ. मिश्र ने अंधविश्वास के दो मुख्य प्रकार बताए एक सामाजिक परंपराओं से जुड़े (जैसे नजर लगना, बिल्ली रास्ता काटना, ग्रह-नक्षत्र) और दूसरे बीमारियों से जुड़े। लोग बीमारी का कारण जादू-टोना मानकर बैगा या गुनिया के पास जाते हैं जिससे ठगी, बलि और डायन प्रथा जैसी घटनाएं बढ़ती हैं। असल में बीमारियां संक्रमण, कुपोषण या दुर्घटना से होती हैं, जिनका इलाज वैज्ञानिक तरीके से होना चाहिए।
डॉ. मिश्र ने समाज से अपील की कि हर व्यक्ति आगे आए और निर्दोष महिलाओं को बचाए। झारखंड में डायन प्रथा निरोधक कानून है, लेकिन इसका प्रचार ग्रामीण इलाकों में कम है। पोस्टर लगवाने, ग्राम पंचायतों में जागरूकता फैलाने की जरूरत है। पीड़ित महिलाओं के लिए उपचार, मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग की।
पिछले सप्ताह उनके झारखंड दौरे में युवा मंच के विकास कुमार, अंकुर, प्रदीप के साथ सिदगोड़ा लाइब्रेरी में चर्चा हुई। अर्जक संघ के आर.बी. साहू, सामाजिक कार्यकर्ता अर्पिता श्रीवास्तव और स्कूली बच्चों के साथ बिस्टुपुर में वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर व्याख्यान सत्र आयोजित किए गए।


