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ग़ाज़ियाबाद: तीन नाबालिग़ बहनों की मौत को लेकर पुलिस और सोसाइटी के लोग क्या कह रहे हैं?
08-Feb-2026 10:10 AM
ग़ाज़ियाबाद: तीन नाबालिग़ बहनों की मौत को लेकर पुलिस और सोसाइटी के लोग क्या कह रहे हैं?

-शुभांगी मिश्रा

उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद की एक रिहायशी सोसाइटी में तीन नाबालिग़ बच्चियों की मौत ने एक बार फिर से तकनीक के इस दौर में पैरेंटिंग पर बहस तेज़ कर दी है.

ग़ाज़ियाबाद के शालीमार गार्डन की यह घटना कई दिनों से सुर्खियों में है और कई तरह की बातें कही जा रही हैं.

शालीमार गार्डन के एसीपी अतुल कुमार सिंह ने पत्रकारों को बताया, "चार फ़रवरी की रात लगभग सवा दो बजे सूचना मिली कि टीला मोड़ पुलिस स्टेशन क्षेत्र के तहत भारत सिटी में एक घटना हुई है.''

''सूचना मिलते ही पुलिस मौक़े पर पहुंची. वहाँ तीनों बच्चियों की ऊंची इमारत से गिरने के कारण मौत हो गई थी. उन्हें 108 एम्बुलेंस के ज़रिए लोनी के एक अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत, घोषित कर दिया. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है."

हालांकि इस मामले में अब तक पुलिस ने कोई मुक़दमा दर्ज नहीं किया है. पुलिस के मुताबिक़ इन बच्चियों से उनका फ़ोन छीन लिया गया था.

ट्रांस हिंडन ग़ाज़ियाबाद के उपायुक्त निमिष पाटिल ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया कि पुलिस अभी ये जांच कर रही है कि क्या ये आत्महत्या का मामला था.

पुलिस ने क्या बताया
उपायुक्त निमिष पाटिल का कहना है, ''पुलिस ने अभी इस मामले में एफ़आईआर दर्ज नहीं की है. शुरुआती जांच में फ़ोन और कोरियाई संस्कृति के प्रति जुनून इस घटना का मुख्य कारण हो सकते हैं.''

''लड़कियां कोरियाई संगीत, ड्रामा, हस्तियों, जापानी फिल्मों और 'डोरेमोन' के अलावा 'शिन-चैन' जैसे कार्टूनों के साथ-साथ ऑनलाइन गेम्स की शौकीन थीं."

"साथ ही वे कोरियाई कल्चर से इस हद तक प्रभावित थीं कि उन्होंने अपने नाम भी बदल लिए थे. लेकिन ब्लू व्हेल' जैसे टास्क-आधारित गेम को इस घटना का एकमात्र या मुख्य कारण नहीं माना जा सकता."

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि तीनों बच्चियों की मौत शरीर से ज़्यादा ख़ून निकलने और चोट से हुई है. ऊंचाई से गिरने के कारण कई हड्डियां टूटी हुई थीं.

निमिष पाटिल ने कहा कि सुसाइड नोट में एक लाइन मार पीट की थी लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ऐसी कोई चोट नहीं मिली है.

निमिष पाटिल ने बताया, ''परिवार आर्थिक तंगी की मार झेल रहा था और घर में कलह ने भी चीज़ें मुश्किल बना दी थीं. कोविड के बाद परिवार को भारी आर्थिक नुक़सान उठाना पड़ा और काफ़ी कर्ज़ में आ गया. कुछ साल पहले लड़कियों को परिवार ने स्कूल से निकाल लिया था.''

उन्होंने बताया, ''परिवार में झगड़े भी होते थे. पिता बेटियों को लेकर बहुत कड़ाई बरतते थे. शुरू में इन बच्चियों के पास दो मोबाइल थे, जिसे वे साझा करती थीं. लेकिन आर्थिक दबाव के चलते पिता ने छह महीने पहले एक मोबाइल को बेच दिया. फिर दूसरा मोबाइल घटना के 10-15 दिन पहले बेच दिया था.''

बच्चियों के पिता और सोसाइटी के लोगों ने क्या बताया
जब आर्थिक तंगी के बारे में मृत लड़कियों के पिता चेतन कुमार से पत्रकारों ने सवाल पूछा तो उनका कहना था, "मुझे 20-30 लाख रुपए का नुक़सान ज़रूर हुआ था लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे आत्महत्या जैसा क़दम उठा लें. बच्चों ने अपने नाम तक बदल लिए थे.''

पुलिस ने बताया, ''चेतन कुमार की दो पत्नियां हैं, जो आपस में सगी बहनें हैं. घर में उनके साथ उनकी एक साली भी रहती हैं. अपनी दोनों पत्नियों से उनके कुल पाँच बच्चे हैं.''

चेतन पेशे से स्टॉक ब्रोकर हैं. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ''बेटियां कहती थीं कि पापा हम कोरिया जाएंगे. उन्हें भारतीय नामों से चिढ़ होने लगी थी."

बीबीसी ने स्थानीय लोगों से इस घटना के बारे में बात की तो सोसाइटी में इन बच्चियों के घर से ठीक दो फ्लोर नीचे रहने वाले आरके सिंघानिया की उस रात नींद एक धमाके की आवाज से टूटी.

आवाज़ सुनने के बाद सोसाइटी के लोग घर से बाहर आने लगे और देखा कि ज़मीन पर तीन बच्चियों के शव थे, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई.

सोसाइटी के सचिव राहुल कुमार झा ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी को बताया, "जब मैं प्राइमरी एविडेंस के तौर पर ऊपर गया, तो वो कमरा अंदर से बंद था. इसी कमरे से बच्चियों के कूदने की बात कही जा रही है. पुलिस ने उस दरवाज़े को तोड़ा. अंदर फ़ैमिली की तस्वीरें पूरे फ़र्श पर बिखरी हुई थीं और कमरे में एक सुसाइड नोट भी मिला. जिसमें 'सॉरी पापा' लिखा हुआ था."

इस घटना के बाद बच्चों के बीच फ़ोन एडिक्शन को लेकर फिर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं.

सोसाइटी की निवासी कुसुम कहती हैं, "हमारे बच्चे रात को सो नहीं पा रहे हैं. वे इतने डरे हुए हैं. मैं मानती हूं कि कम से कम मां-बाप को पता होना चाहिए कि बच्चे फ़ोन में क्या चला रहे हैं."

साथ ही सोसाइटी में रह रहे लोग फ़ोन मैनेजमेंट और काउंसलिंग को लेकर विचार-विमर्श करते दिखे.  (bbc.com/hindi)


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