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फायर स्टेशन के निर्माण में 5 साल की देरी से हाईकोर्ट नाराज, पूरे राज्य की रिपोर्ट मांगी
08-Feb-2026 12:09 PM
फायर स्टेशन के निर्माण में 5 साल की देरी से हाईकोर्ट नाराज, पूरे राज्य की रिपोर्ट मांगी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 8 फरवरी। बिलासपुर में फायर स्टेशन के निर्माण में देरी को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। अदालत ने कहा कि इस सार्वजनिक महत्व के कार्य में अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य शासन ने हाईकोर्ट को दिए गए शपथपत्र में जानकारी दी है कि नए फायर स्टेशन के निर्माण के लिए कार्यादेश जारी कर दिया गया है और ठेकेदार को 15 दिन के भीतर अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि यह मामला जनहित से जुड़ा है, इसलिए फायर स्टेशन निर्माण की प्रगति और गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को तय की गई है।

राज्य शासन के शपथपत्र के अनुसार, बिलासपुर में फायर स्टेशन के निर्माण को वर्ष 2020 में ही स्वीकृति मिल गई थी। इसके बावजूद लगभग ढाई साल तक जिला प्रशासन उपयुक्त भूमि का चयन नहीं कर सका। पहले सकरी रोड और कोनी क्षेत्र पर विचार किया गया, लेकिन अंततः कुड़ूदंड को निर्माण स्थल के रूप में अंतिम रूप दिया गया।

प्रशासन ने बताया कि चयनित जमीन दलदली होने के कारण वहां विशेष राफ्ट फाउंडेशन तकनीक से निर्माण करना आवश्यक था। इसी वजह से संशोधित लागत अनुमान तैयार करने और उसकी मंजूरी में लगभग दो साल का समय लग गया। इसके बाद नियमों के अनुरूप चेकलिस्ट समय पर नहीं भेजे जाने के कारण पुरानी निविदा भी निरस्त करनी पड़ी।

वर्तमान में बिलासपुर की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था एक अस्थायी फायर स्टेशन के भरोसे है। यहां न तो पर्याप्त कर्मचारी हैं और न ही आधुनिक उपकरण। पुराने वाहनों और सीमित जल भंडारण क्षमता के कारण किसी बड़े अग्निकांड या आपात स्थिति में प्रभावी राहत और बचाव कार्य कर पाना लगभग असंभव हो जाता है।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन ने बताया कि अब फायर स्टेशन का निर्माण 1.55 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। ठेकेदार को 15 दिन के भीतर अनुबंध पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। तय समयसीमा का पालन न होने पर जमानत राशि जब्त करने की चेतावनी भी दी गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने न केवल बिलासपुर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के फायर स्टेशनों की स्थिति पर भी जानकारी तलब की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में राज्य में केवल 9 पूर्ण रूप से सुसज्जित फायर स्टेशन ही संचालित हैं। न्यायालय ने कहा है कि नागरिक सुरक्षा से जुड़े इस विषय पर निरंतर निगरानी जारी रहेगी।


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