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पूर्व मंत्री ने भी जांच की मांग उठाई
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
कोरबा, 2 फरवरी। कोरबा शहर में गहन मतदाता पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फर्जी आपत्तियां दाखिल किए जाने के कई मामले सामने आ रहे हैं। अब तक 7 नागरिकों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है, जिसके आधार पर एफआईआर पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी गई है। वहीं, पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने कलेक्टर और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले दावा-आपत्ति अवधि के दौरान शहर के 1566 मतदाताओं के नाम और ईपिक नंबर के आधार पर आपत्तियां दर्ज की गईं। निर्धारित समयसीमा के बाद जब इन आपत्तियों से जुड़ी सूची वायरल हुई, तो शहर में हड़कंप मच गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन लोगों के नाम 2003 की मतदाता सूची में भी दर्ज थे, उनके नाम भी हटाने की मांग की गई।
जिन नागरिकों के नाम और ईपिक नंबर का उपयोग कर आपत्तियां दाखिल की गई थीं, उन्होंने संबंधित लोगों से संपर्क किया। लेकिन आपत्ति दर्ज करने वालों ने इससे साफ इनकार कर दिया। इसके बाद यह स्पष्ट हुआ कि किसी अन्य ने पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से नाम कटवाने की प्रक्रिया अपनाई।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद पंप हाउस क्षेत्र के निवासी मथुरा दास महंत, बसंत खैरवार, घासी राम मांझी, फखरुद्दीन खान, जमींदार आलम, कृष्ण कुमार ठाकुर और शान कुमार साहिस ने सीएसईबी पुलिस चौकी पहुंचकर लिखित शिकायत दी। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसी तरह शहर के 5 भाजपा बूथ अध्यक्षों ने भी कोतवाली थाना कोरबा में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष मोहम्मद शाहिद ने आरोप लगाया कि विशेष समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाकर उनके नाम हटाने की कोशिश की गई है। उन्होंने प्रशासन से ऐसे लोगों की पहचान कर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की।
पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने कहा कि कोरबा विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची शुद्धिकरण के नाम पर गंभीर अनियमितताएं की जा रही हैं। उनके अनुसार यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र है, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करना है।
मामले में यह भी सामने आया है कि फॉर्म-7 का व्यापक दुरुपयोग करते हुए फर्जी आवेदन और पहचान की चोरी की गई। जिन मतदाताओं के नाम और ईपिक नंबर का उपयोग किया गया, वे इस पूरी प्रक्रिया से पूरी तरह अनजान हैं। मांग की जा रही है कि शारीरिक और दस्तावेजी सत्यापन के साथ निष्पक्ष जांच हो, दोषियों और उन्हें निर्देश देने वालों के नाम सार्वजनिक किए जाएं।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने को केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला है। इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 326 का घोर उल्लंघन करार देते हुए उन्होंने व्यापक और पारदर्शी जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है।


