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देहरादून, 23 जनवरी। उत्तराखंड में शुक्रवार को ऊंचाई वाले इलाकों में जबरदस्त बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश से किसानों व बागवानों के मुरझाए चेहरों पर रौनक लौट आयी।
सर्दियों की एक लंबी अवधि सूखी रह जाने के कारण निचले इलाकों में रबी की फसलों पर संकट गहरा गया था जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब बागानों के मालिक ‘फ्रूट सेटिंग’ के लिए जरूरी बर्फवारी न होने से पैदावर ठप्प होने को लेकर चिंतित थे।
हालांकि नए साल में मौसम के बदले मिजाज से कृषि और बागवानी दोनों क्षेत्रों में एक बार फिर से उम्मीद जागी है।
उत्तरकाशी जिले के मोरी इलाके के नेत्री, चंदेली, स्वील, खलाड़ी, करड़ा, मैराणा और दनमाना जैसे मटर उत्पादक क्षेत्रों के किसानों ने इस समय फसल को मिली बारिश को‘संजीवनी’ बताया।
किसान कवींद्र असवाल ने बताया कि लंबे समय से सूखे जैसे हालात के कारण मटर और गेहूं की फसलें प्रभावित होने लगी थीं तथा मिटटी में नमी की कमी के कारण पौधों का विकास रुक गया था।
उन्होंने कहा, “लेकिन हालिया बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी लौट आई है, जिससे फसलों को जीवनदान मिला है।”
चमोली जिले के दूरस्थ गांव इराणी के पूर्व प्रधान और कृषक मोहन सिंह नेगी ने बताया कि हाल में गेंहू व जौ की बुआई की गयी थी लेकिन बारिश न होने से सूखे व पाले से फसल बर्बाद होने की स्थिति में थी।
उन्होंने बताया, “बारिश और बर्फ ने हमारी फसल में जान फूंक दी है।”
नेगी ने यह भी कहा कि बारिश और बर्फ से अगले माह खेतों में बोए जाने वाली चौलाई व आलू की फसल भी अच्छी होगी।
ऊंचाई वाले इलाकों में सेब बागानों के लिए भी बर्फबारी बेहद जरूरी मानी जाती है।
इस वर्ष अब तक बर्फ न गिरने से बागवानों को सेब उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका सता रही थी।
हालांकि, उंचाई वाले क्षेत्रों में जबरदस्त बर्फवारी से उनके चिंतित चेहरों पर मुसकान खिल गयी है।
उत्तरकाशी जिले के धढोली, करड़ा, खलाड़ी, आराकोट, सांकरी, नैटवाड़ और नौरी जैसे प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में बर्फ पड़ने से लोगों को अब अच्छी पैदावार की उम्मीद जग गयी है।
सेब उत्पादक बिजेन्द्र रावत ने उम्मीद जतायी कि बर्फ पड़ गयी है तो अब सेब की पैदावार भी अच्छी होगी।
सेब व्यवसायी लक्ष्मी प्रसाद सेमवाल ने भी ताजा बर्फबारी पर खुशी जतायी और कहा कि अगर अगले कुछ दिनों में एक बार हिमपात हो जाता है तो यह सेब की फसल के लिए ‘सोने पर सुहागा’ साबित होगा। (भाषा)


