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नयी दिल्ली, 23 जनवरी। राष्ट्रीय राजधानी में 77वीं गणतंत्र दिवस परेड के लिए शुक्रवार को बारिश के बीच ‘फुल ड्रेस रिहर्सल’ किया गया। बारिश की वजह से पूर्वाभ्यास में थोड़ा विलंब हुआ और सैन्य कर्मियों और कलाकारों ने भीगते हुए कर्तव्य पथ पर मार्च किया।
अधिकारियों ने बताया कि खराब मौसम के मद्देनजर फ्लाईपास्ट और परेड के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कुछ हिस्सों का पूर्वाभ्यास नहीं किया जा सका।
उन्होंने बताया कि परेड का ‘फुल ड्रेस रिहर्सल’ पूर्वाह्न करीब 10:30 बजे से पूर्वाह्न 11:45 के बीच हुआ।
हर साल फुल ड्रेस रिहर्सल के दिन भी दर्शकों की भारी भीड़ देखने को मिलती है जिसके लिए आधिकारिक पास जारी किये जाते हैं। हालांकि, खराब मौसम के कारण शुक्रवार को दर्शक दीर्घाओं में सन्नाटा पसरा रहा।
बारिश की बौछारों ने शहर के कुछ हिस्सों में यातायात को भी बाधित कर दिया, लेकिन इससे मार्च करने वाले दल के सदस्यों का उत्साह कम नहीं हुआ।
परेड के मार्ग, विजय चौक से लाल किले तक विभिन्न हथियार प्रणालियों के साथ सैन्यकर्मी मार्च करते हुए निकले, और भीगने के बावजूद उन्होंने उच्च मनोबल और जोश का प्रदर्शन किया।
गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने वाली सेना की टुकड़ियों में से एक के कमांडर ने ‘पीटीआई-भाषा’को बताया, ‘‘बारिश हुई और ठंड एक चुनौती थी। लेकिन मुझे लगता है कि हम सभी के भीतर का जोश हमें उत्साहित करता है क्योंकि हमें कर्तव्य पथ पर अपनी सेवा या किसी मंत्रालय या संगठन का प्रतिनिधित्व करने का सम्मान प्राप्त हुआ है।’’
परेड के मुख्य आकर्षणों में से एक, फ्लाईपास्ट देखने के लिए विशेष रूप से आए कई दर्शक निराश हुए। हालांकि, कुछ लोगों ने कहा कि वे भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विरासत के भव्य प्रदर्शन को देखकर भी संतुष्ट हैं।
गणतंत्र दिवस परेड में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल प्रणालियों के साथ-साथ कई स्वदेशी हथियारों का प्रदर्शन किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले बताया था कि पारंपरिक प्रथा के तहत दर्शक दीर्घाओं के लिए ‘वीवीआईपी’ और अन्य नामों का प्रयोग किया जाता था लेकिन इससे हटकर इस बार सभी स्थानों का नाम भारतीय नदियों के नाम पर रखा गया है।
उन्होंने बताया कि इनमें ब्यास, ब्रह्मपुत्र, चंबल, चिनाब, गंडक, गंगा, घाघरा, गोदावरी, सिंधु, झेलम, कावेरी, कोसी, कृष्णा, महानदी, नर्मदा, पेन्नार, पेरियार, रावी, सोन, सतलुज, तीस्ता, वैगई और यमुना शामिल हैं।
वाराणसी निवासी और प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली में रह रहे प्रभात गौरव (23) ने कहा कि उन्होंने किसी तरह ‘‘अपने मोबाइल फोन और पर्स को भीगने से बचाने के लिए कुछ पॉलिथीन बैग का इंतजाम किया’’।
गौरव रिहर्सल देखने के दौरान पूरी तरह से भीग गए थे और उन्होंने अपना परेड एंट्री पास का बचा हुआ हिस्सा दिखाया जो पूरी तरह से भीगा हुआ था।
गौरव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘ मैं जिस दर्शक दीर्घा में बैठा था उसका नाम कोसी था। मैं अपने चार दोस्तों के साथ परेड देखने गया था। हम सुबह करीब 7:30 बजे दर्शक दीर्घा में पहुंचे और कार्यक्रम स्थल के पास चाय बेचने वालों से कुछ पॉलिथीन बैग खरीद लिए। लेकिन कई लोगों के पास बारिश से खुद को या अपने सामान को बचाने का कोई साधन नहीं था। फिर भी, हमने परेड के फुल ड्रेस रिहर्सल का आनंद लिया।’’
दिल्ली में 2026 की पहली बारिश के साथ शुष्क शीत ऋतु का लंबा दौर आखिरकार शुक्रवार को समाप्त हो गया। यह बारिश इस मौसम के पहले शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई। इस प्रणाली के चलते तेज हवाएं चलीं, गरज के साथ बारिश हुई और समूची दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के स्तर से कुछ समय के लिए राहत मिली।
देशभक्ति के गीत और ओजपूर्ण आवाज में परेड की दी जा रही जानकारी ने दर्शकों को उतनी ही ऊर्जा के साथ आकर्षित किया जितनी ऊर्जा के साथ सेना, नौसेना, भारतीय वायु सेना और अर्धसैनिक बलों की सैन्य टुकड़ियां कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ते हुए कर रहीं थीं।
इस वर्ष के समारोह का मुख्य विषय ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष हैं। गणतंत्र दिवस के दौरान 30 झांकियां शामिल होंगी जिनमें से 17 विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की हैं जबकि शेष 13 मंत्रालयों और सेवाओं की हैं।
फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान विभिन्न झांकियों का प्रदर्शन किया गया।
सैन्य मामलों के विभाग की झांकी में पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत की जीत और निर्णायक कार्रवाई के दौरान सशस्त्र बलों की तीनों शाखाओं द्वारा प्रदर्शित एकजुटता को दर्शाया गया है।
पूरे मार्ग पर दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियों के सुरक्षाकर्मी रेनकोट पहने हुए लगातार बारिश के बावजूद इलाके की बारीकी से निगरानी करते और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते नजर आए। (भाषा)


