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छत्तीसगढ़ न्यूज़ डेस्क
स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों के बीच यह भ्रम आम है कि Face ID को किसी व्यक्ति की फोटो दिखाकर फोन अनलॉक किया जा सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यह धारणा ग़लत है। Face ID साधारण तस्वीर पर नहीं, बल्कि चेहरे की त्रि-आयामी (3D) संरचना पर काम करता है।
Face ID तकनीक में फोन का सेंसर सिस्टम उपयोगकर्ता के चेहरे पर हज़ारों अदृश्य इन्फ्रारेड डॉट्स प्रोजेक्ट करता है। ये डॉट्स चेहरे की गहराई, बनावट, आकृति और विशिष्ट विशेषताओं को पढ़ते हैं। इसके बाद फोन इन आंकड़ों के आधार पर चेहरे का एक सटीक 3D डिजिटल मैप तैयार करता है, जिसे सुरक्षित रूप से डिवाइस के भीतर संग्रहित किया जाता है।
तकनीकी जानकार बताते हैं कि सामान्य फोटो दो-आयामी (2D) होती है, जिसमें गहराई और वास्तविक आकार की जानकारी नहीं होती। यही वजह है कि किसी व्यक्ति की फोटो, वीडियो या स्क्रीन पर दिखाई गई तस्वीर से Face ID धोखा नहीं खाता। फोन यह जांचता है कि सामने मौजूद चेहरा वास्तविक है या नहीं, और उसमें प्राकृतिक गहराई व संरचना है या नहीं।
आधुनिक Face ID सिस्टम में अतिरिक्त सुरक्षा के लिए लाइवनेस डिटेक्शन भी होता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सामने कोई जीवित इंसान है, न कि मास्क, प्रिंट या डिजिटल इमेज। कई मामलों में आंखों की गतिविधि और चेहरे की हल्की हरकतों को भी पढ़ा जाता है।
तकनीक विशेषज्ञों का कहना है कि Face ID को बायोमेट्रिक सुरक्षा का एक उन्नत रूप माना जाता है, जो पारंपरिक पासवर्ड या पिन की तुलना में अधिक सुरक्षित है। हालांकि, किसी भी तकनीक की तरह इसमें भी सावधानी जरूरी है, लेकिन सिर्फ़ एक फोटो दिखाकर Face ID को तोड़ पाना संभव नहीं है।


