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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 16 जनवरी। जिले के उपार्जन केंद्रों में धान की सुरक्षा व उठाव को लेकर भारी चूक सामने आई है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के गौरेला पेंड्रा रोड और गुल्ली डांड स्थित दो उपार्जन केंद्रों में करीब 20 हजार बोरी धान सड़ गया या कीड़ों से खराब हो गया है। इनमें से 8 हजार क्विंटल से अधिक धान पूरी तरह अनुपयोगी बताया जा रहा है। इस बर्बादी की कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है।
इस नुकसान के लिए न तो चूहे जिम्मेदार हैं और न ही मौसम। असल वजह समय पर कस्टम मिलिंग के लिए धान का उठाव नहीं होना है। आरोप है कि जिला विपणन विभाग समय रहते धान उठाने और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था नहीं कर पाया। नतीजतन खुले आसमान के नीचे रखी हजारों बोरियां धीरे-धीरे सड़ती चली गईं।
गौरेला उपार्जन केंद्र में खराब धान में कीड़े लग चुके हैं, जिससे वह किसी भी सामान्य उपयोग के लायक नहीं बचा है। इससे सरकारी खजाने को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि किसानों की मेहनत पर भी सवाल खड़े करती है।
हालांकि अधिकारी यह कहकर नुकसान कम दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि खराब धान को पैराबॉयल्ड राइस या पशु आहार के रूप में उपयोग किया जा सकता है, लेकिन जानकारों का कहना है कि इससे पूरी भरपाई संभव नहीं है।
जिला विपणन अधिकारी हरिश शर्मा ने कहा कि धान उठाव के लिए पहले ही डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) जारी किया जा चुका है और राइस मिलर्स तैयार हैं। दोनों केंद्रों से धान का उठाव अगले कुछ दिनों में कर लिया जाएगा। कुछ मिलर्स पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है। हालांकि खराब हुए धान की भरपाई कैसे की जाएगी, इसका जवाब उनके पास नहीं था।


