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युवक कांग्रेस ने कफन ओढ़कर किया प्रदर्शन, पूर्व मंत्री कंवर ने भी उठाए सवाल
तहसीलदार एसईसीएल के लिए भू-अर्जन में व्यस्त, नायब तहसीलदार की पोस्टिंग ही नहीं
प्रशासन ने जांच करा ली- टोकन रकबे के मुद्दे को नकारा, डीन ने जहरखुरानी के लक्षण मिलने से इनकार किया
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोरबा, 14 जनवरी। जिले के हरदीबाजार तहसील क्षेत्र में टोकन न मिलने और रकबा संशोधन लंबित रहने से फिर एक किसान ने जहर पी लिया। उसे भी गंभीर हालत में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। इन घटनाओं ने जिले में किसान संकट, राजस्व व्यवस्था की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हरदीबाजार क्षेत्र के ग्राम झांझ निवासी 55 वर्षीय किसान बैसाखू गोंड़ ने 3.27 एकड़ में धान की फसल ली थी। नियमानुसार करीब 68 क्विंटल धान की खरीदी होनी थी, लेकिन एग्रो पोर्टल में केवल 11 क्विंटल दर्ज हुआ। गिरदावरी के दौरान पूरे खेत की बजाय आंशिक फसल दर्ज होने से यह स्थिति बन गई। सुधार के लिए बैसाखू कई बार तहसील कार्यालय पहुंचा, मगर हर बार निराशा हाथ लगी। मंगलवार को बैसाखू एक बार फिर तहसील पहुंचा। समस्या का समाधान नहीं होने और अधिकारियों की अनुपस्थिति से आहत होकर उसने अपने साथ लाया जहर तहसील परिसर में ही पी लिया।
उसके साथी एक किसान के मुताबिक, बैसाखू कर्ज के दबाव में था और पिछले डेढ़-दो महीने से दफ्तरों के चक्कर काट रहा था। वह 20 किलोमीटर दूर गांव से साइकिल चलाकर, उपवास की हालत में तहसील पहुंचा था। ग्रामीणों का कहना है कि हरदीबाजार तहसील में लंबे समय से अव्यवस्था बनी हुई है। तहसीलदार की नियमित मौजूदगी नहीं होने से रकबा सुधार, एसआईआर, सत्यापन और न्यायालयीन कार्य प्रभावित हैं। किसानों के नाम, मोबाइल नंबर और फसल विवरण में त्रुटियां सुधारने के लिए तहसील सत्यापन जरूरी है, लेकिन कर्मचारियों के पास केवल तारीखें और आश्वासन ही मिल रहे हैं।
धान खरीदी की अंतिम तिथि करीब आने से किसानों की बेचैनी और बढ़ रही है।
मालूम हो कि इससे एक दिन पहले हरदीबाजार क्षेत्र के ग्राम कोरबी धतुरा निवासी सुमेर सिंह गोंड़ ने भी जहर सेवन किया था। मेडिकल कॉलेज में भर्ती सुमेर की हालत पहले स्थिर बताई गई, लेकिन बाद में उन्हें आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा। सुमेर अभी बातचीत करने की स्थिति में नहीं हैं। उसके घर में 68 क्विंटल धान रखा था, जिसकी बिक्री से कर्ज चुकाने और घरेलू जरूरतें पूरी होनी थीं।
हरदीबाजार तहसीलदार अभिजीत राजभानू ने दावा किया है कि बैसाखू गोंड़ का मामला तहसील स्तर से निपट चुका था, लेकिन खाद्य शाखा में सर्वर डाउन होने से आगे की प्रक्रिया रुक गई। उनका तर्क है कि नायब तहसीलदार की पदस्थापना नहीं होने और एसईसीएल भू-अर्जन सहित अन्य न्यायालयीन कार्यों के कारण वर्कलोड अत्यधिक है।
अधिवक्ता संघ हरदीबाजार के अध्यक्ष चंद्रशेखर भारद्वाज ने कहा है कि तहसील राजस्व न्यायालय है, लेकिन जब यहीं न्याय नहीं मिल रहा तो लोग कहां जाएं। संघ ने एक माह पहले ही स्थायी तहसीलदार और नायब तहसीलदार की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
लगातार दूसरी घटना के बाद युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कोरबा में कलेक्टर कार्यालय के सामने अनोखा विरोध किया। कार्यकर्ता कफन ओढ़कर सड़क पर लेट गए और बाद में कफन जलाकर नारेबाजी की।
उनका आरोप है कि सरकार किसानों का पूरा धान खरीदने के मूड में नहीं है, इसलिए कभी रकबा कटता है तो कभी टोकन रोके जाते हैं।
सत्तारूढ़ भाजपा के वरिष्ठ नेता ननकीराम कंवर ने किसानों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि धान खरीदी की प्रक्रिया को जटिल बनाकर किसानों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर समस्या उठाने की बात कही।
दो घटनाओं के बाद कलेक्टर कुणाल दुदावत के आदेश पर एक पटवारी को निलंबित किया गया और तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ। हालांकि प्रशासनिक जांच में दावा किया गया कि सुमेर सिंह के मामले में आत्महत्या के प्रयास का सीधा संबंध धान खरीदी से नहीं पाया गया। जांच में कहा गया कि संबंधित भूमि पर खरीफ मौसम में फसल नहीं ली गई थी।
वहीं मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. केके सहारे ने बताया कि सुमेर सिंह में जहरखुरानी के लक्षण नहीं मिले, बल्कि शराब उतरने के बाद के लक्षण पाए गए हैं। बेहतर इलाज के लिए उसे एम्स रायपुर रेफर किया जा रहा है।


