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संघर्ष समिति ने कहा- केवल केंद्री की परियोजना पूरे प्रदेश की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएगी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 30 दिसंबर। छात्र युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार की रेलवे टर्मिनल विस्तार योजना में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के जोनल मुख्यालय बिलासपुर को शामिल करने की मांग की है। समिति का कहना है कि छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्य में केवल नया रायपुर (केंद्री) में नया टर्मिनल बनाना पूरे प्रदेश की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता।
मालूम हो कि केंद्र सरकार ने 2030 तक देश के 50 प्रमुख रेलवे स्टेशनों से चलने वाली ट्रेनों की कोचिंग टर्मिनल क्षमता को दोगुना करने का रणनीतिक निर्णय लिया है। इसके तहत चयनित शहरों में टर्मिनल विस्तार होना है। समिति ने बताया कि मध्य प्रदेश में इंदौर, भोपाल और जबलपुर जैसे शहरों को इस योजना में शामिल किया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ में केवल नया रायपुर का प्रस्ताव रखा गया है।
समिति के अनुसार, इसका अर्थ यह है कि छत्तीसगढ़ के दो बड़े और पुराने कोचिंग टर्मिनल बिलासपुर और दुर्ग की क्षमता में कोई विस्तार नहीं होगा। दुर्ग में भूमि की समस्या बताई जाती है, लेकिन बिलासपुर में ऐसी कोई बाधा नहीं है। उसलापुर, दाधापारा और गतौरा, तीनों दिशाओं में रेलवे के पास पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, जहां बड़े कोचिंग टर्मिनल का निर्माण संभव है।
समिति ने तर्क दिया कि बिलासपुर से चलने वाली अधिकांश ट्रेनें रायपुर और दुर्ग-भिलाई को सेवा देते हुए आगे जाती हैं, और दुर्ग से चलने वाली गाड़ियां भी रायपुर व बिलासपुर को कवर करती हैं। इसके विपरीत, यदि नया रायपुर में ही टर्मिनल बनाया गया तो वह या तो बिलासपुर क्षेत्र को या दुर्ग-भिलाई क्षेत्र को छोड़कर ही सेवाएं दे पाएगा। ऐसे में नई ट्रेनों का लाभ राज्य को आधा-अधूरा मिलेगा।
समिति ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को याद दिलाया कि बिलासपुर जोन देश के सबसे अधिक राजस्व देने वाले जोनों में शामिल है। ऐसे में यात्री सुविधाओं और टर्मिनल विस्तार के मामले में मुख्यालय की उपेक्षा न्यायसंगत नहीं है।
छात्र युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति ने इस मांग को आगे बढ़ाते हुए बिलासपुर के स्थानीय केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू को भी ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है, ताकि बिलासपुर को रेलवे टर्मिनल विस्तार योजना में शामिल कराया जा सके।


