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'छत्तीसगढ़' संवाददाता
गरियाबंद, 26 दिसंबर। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में एक बार फिर वन अमले की तत्परता और साहस देखने को मिला, जब ड्रोन की उपयोगिता फेल होने के बावजूद एंटी पोचिंग टीम ने घायल तेंदुए का सफल रेस्क्यू कर उसकी जान बचाई। शिकारियों के फंदे में फंसा तेंदुआ ग्रामीण बस्ती के बेहद करीब पहुंच गया था, जिससे जनहानि की आशंका बनी हुई थी।
25 दिसंबर को दोपहर करीब 2 बजे, तौरेंगा (बफर) क्षेत्र के ग्राम कोकड़ी से सूचना मिली कि एक तेंदुआ झाडिय़ों में छिपकर बैठा है और बस्ती की ओर बढ़ रहा है। सूचना मिलते ही सहायक संचालक उदंती (मैनपुर) एवं एंटी पोचिंग टीम के नोडल अधिकारी एसडीओ गोपाल कश्यप तत्काल एक्शन मोड में आए और ड्रोन व टीम को मौके पर बुलाया गया।
घनी झाडिय़ों के कारण ड्रोन से निगरानी असफल रही। तेंदुए के गले में गंभीर घाव दिखाई दे रहा था और अंधेरा होने से पहले ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एसडीओ गोपाल कश्यप ने अकेले ही रस्सी का जाल तेंदुए पर फेंककर उसे काबू में किया। इस दौरान तेंदुए ने उन पर हमला भी किया, लेकिन साहस और सूझबूझ से स्थिति को नियंत्रित किया गया।
स्थानीय ग्रामीणों और वन बल की मदद से तेंदुए को गजराज रेस्क्यू वाहन में रखे पिंजरे में सुरक्षित किया गया और आबादी से दूर तौरेंगा रेस्ट हाउस लाया गया। रात करीब 8 बजे जंगल सफारी से पहुंचे डॉ. जय किशोर जडिया, सहायक रमाकांत एवं उनकी टीम ने तेंदुए को बेहोश कर उसके गले में फंसे दो क्लच वायर फंदे निकाले। ड्रिप और प्राथमिक उपचार से तेंदुए की हालत में सुधार हुआ।
जांच में सामने आया कि तेंदुआ लगभग 7 दिनों से घायल था और फंदों के कारण उसका दम घुटने की स्थिति बन गई थी। इसी वजह से वह आसान शिकार की तलाश में आबादी क्षेत्र की ओर आ गया था और हाल ही में कोकड़ी गांव के एक कुत्ते का शिकार कर चुका था। तेंदुए से ग्रामीणों व बच्चों को खतरा बना हुआ था।
तेंदुए को तड़के सुबह 4 बजे गजराज वाहन से जंगल सफारी अस्पताल सुरक्षित पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। पूर्ण रूप से स्वस्थ होने के बाद उसे पुन: उदंती-सीतानदी के जंगलों में छोड़ा जाएगा।
इस मामले में वन्यप्राणी अपराध प्रकरण दर्ज कर फंदों की जब्ती की गई है। आरोपियों की तलाश के लिए डॉग स्क्वाड, स्पाई कैमरा और गोपनीय सूचना तंत्र की मदद ली जा रही है।
वन विभाग के अनुसार, अवैध शिकार के कारण घायल वन्यप्राणी ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर हमले की स्थिति बना रहे हैं। पिछले 7 दिनों में 19 शिकारी गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें सांबर शिकार, मयूर को कैद में रखने और जंगल में आग लगाने जैसे मामले शामिल हैं।
डीएफओ वरुण जैन ने आम नागरिकों से अपील की है कि फंदे लगाने वाले शिकारियों की सूचना देने या पकड़वाने पर 5,000 से 10,000 रु. तक का गोपनीय इनाम दिया जाएगा। संपर्क नंबर- 7568127875।
मात्र 35 प्रतिशत स्टाफ और वाहनों की कमी के बावजूद टाइगर रिजर्व की टीम लगातार एक्शन मोड में है। अवैध शिकार प्रभावित क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी जारी है। पिछले 3 वर्षों में 750 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई गई है और 500 से अधिक शिकारी, तस्कर व अतिक्रमणकारी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
इस साहसिक रेस्क्यू में सहायक संचालक/नोडल एंटी पोचिंग गोपाल कश्यप, डॉ. जय किशोर जडिया, सहायक रमाकांत, एसडीओ जगदीश प्रसाद दरों एवं एसडीओ भोपाल सिंह राजपूत की अहम भूमिका रही।



