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शीतकालीन अवकाश में हुई विशेष सुनवाई
छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 24 दिसंबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के मामले में संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए फैसला दिया है। शीतकालीन अवकाश के दौरान विशेष सुनवाई कर हाईकोर्ट ने पीड़िता को गर्भपात की अनुमति प्रदान की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दुष्कर्म की शिकार पीड़िता को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह गर्भ को जारी रखना चाहती है या नहीं।
मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की एकल पीठ में जस्टिस पीपी साहू ने की। अदालत ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर रायपुर के मेकहारा और पं जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ की निगरानी में गर्भपात कराने के निर्देश दिए।
मामला रायपुर जिले की 16 वर्षीय नाबालिग लड़की का है। आरोप है कि एक युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। समय बीतने के साथ जब परिजनों को संदेह हुआ और चिकित्सकीय जांच कराई गई, तो पता चला कि पीड़िता करीब छह माह (लगभग 25 सप्ताह) की गर्भवती है।
गंभीर स्थिति को देखते हुए पीड़िता ने अपने परिजनों के माध्यम से हाईकोर्ट में गर्भपात की अनुमति के लिए याचिका दायर की थी। 19 दिसंबर को अदालत ने अस्पताल और मेडिकल कॉलेज को मेडिकल बोर्ड गठित कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि गर्भपात से पीड़िता को कोई गंभीर चिकित्सकीय खतरा नहीं है।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि गर्भपात मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट, 1971 के प्रावधानों के तहत किया जाए। इसमें दो पंजीकृत चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी अनिवार्य होगी। साथ ही, भविष्य में साक्ष्य के लिए भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।


