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एनआईटी रायपुर से हटाने का आदेश रद्द, डॉ. आरिफ को विकल्प चुनने की छूट दी हाईकोर्ट ने
22-Dec-2025 11:35 AM
एनआईटी रायपुर से हटाने का आदेश रद्द, डॉ. आरिफ को विकल्प चुनने की छूट दी हाईकोर्ट ने

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 22 दिसंबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी रायपुर के रजिस्ट्रार पद से डॉ. आरिफ खान को हटाने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने माना कि संस्थान का निर्णय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था।

डॉ. आरिफ खान वर्तमान में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर में वित्त अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, इसलिए कोर्ट ने एनआईटी रायपुर में उनकी पुनर्बहाली का निर्देश नहीं दिया। लेकिन अदालत ने उन्हें यह स्वतंत्रता दी कि वे अपनी सेवा के लिए संस्थान का विकल्प स्वयं चुन सकते हैं।

डॉ. खान ने 23 फरवरी 2023 को एनआईटी रायपुर के निदेशक द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके जरिए उन्हें रजिस्ट्रार पद पर बनाए नहीं रखने का निर्णय लिया गया था।
याचिका में कहा गया कि आदेश मनमाना है और बिना सुनवाई का अवसर दिए पारित किया गया, जो प्राकृतिक न्याय का स्पष्ट उल्लंघन है।

याचिकाकर्ता के अनुसार, रजिस्ट्रार पद के लिए 24 जनवरी 2020 को विज्ञापन जारी हुआ था। कोविड-19 के कारण चयन प्रक्रिया में देरी हुई, लेकिन भर्ती नियम 2019 के तहत विधिवत चयन समिति गठित कर प्रक्रिया पूरी की गई। इन नियमों के अनुसार रजिस्ट्रार का पद पांच वर्ष की निश्चित अवधि के लिए होता है। इसी प्रक्रिया के तहत 22 फरवरी 2021 को डॉ. खान की नियुक्ति हुई और 24 फरवरी 2021 को उन्होंने कार्यभार संभाला।

25 फरवरी 2022 को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की 52वीं बैठक में उनके कार्य निष्पादन की समीक्षा की गई। विचार-विमर्श के बाद बोर्ड ने उनके कार्य को संतोषजनक मानते हुए पांच वर्ष की अवधि के लिए नियुक्ति की पुष्टि का निर्णय लिया। इसकी सूचना 10 मार्च 2022 को दी गई, लेकिन औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ, जिससे आहत होकर डॉ. खान ने अभ्यावेदन दिया।

याचिका में यह भी तर्क रखा गया कि एनआईटी श्रीनगर और एनआईटी सूरत सहित अन्य संस्थानों में रजिस्ट्रारों की नियुक्ति नियमों के अनुसार पांच वर्ष के लिए की गई है, जबकि एनआईटी रायपुर में उनके साथ अलग व्यवहार किया गया।

मामले की सुनवाई जस्टिस ए के प्रसाद की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में पुनर्बहाली का आदेश व्यावहारिक नहीं होगा, लेकिन 23 फरवरी 2023 का आदेश प्रक्रियात्मक अनियमितता और प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन के आधार पर रद्द किया जाता है। इसी के साथ याचिका का निराकरण कर दिया गया।


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