ताजा खबर
अभियोजन के बयान, साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट में भारी विरोधाभास, तत्काल रिहाई का आदेश
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 29 नवंबर। सक्ती के राजा धर्मेंद्र सिंह उर्फ धर्मेंद्र सिदार को दुष्कर्म की कोशिश और छेड़खानी के आरोपों से हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने बरी कर दिया है। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें अलग-अलग धाराओं में पांच और सात साल की कठोर सजा सुनाई थी, जिसके बाद वे जेल में थे। हाई कोर्ट ने फैसला पलटते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
धर्मेंद्र सिंह ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करते हुए खुद को निर्दोष बताया। उनका कहना था कि गोद लेने, संपत्ति और उत्तराधिकार को लेकर परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा है। युवराज घोषित होने के बाद उनके खिलाफ बार-बार झूठी शिकायतें दर्ज कराई जाती रहीं और यह मामला भी उसी कड़ी का हिस्सा है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की बेंच ने आदेश में कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष के बयान और पूर्व बयानों में विरोधाभास है, चिकित्सकीय प्रमाणों का अभाव है और महत्वपूर्ण गवाहों की जांच नहीं की गई। प्रकरण में साक्ष्यों की कमी है और गवाहों का मुकर जाना भी शामिल है।
कोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों में ट्रायल कोर्ट का फैसला टिकाऊ नहीं है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की तत्काल रिहाई का आदेश दिया है।
मालूम हो कि 10 जनवरी 2022 को एक महिला ने पुलिस में लिखित शिकायत दी थी कि 9 जनवरी की रात करीब 9 बजे वह घर पर अकेली थी, तभी आरोपी धर्मेंद्र सिदार उसके घर में घुस आया। आरोपी ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया, दुष्कर्म की कोशिश की, कपड़े फाड़ने की कोशिश की,हाथापाई में उसकी चूड़ियां टूट गईं, मगर शोर मचाने पर आरोपी भाग गया।
इस शिकायत के आधार पर धारा 450, 354 और 377 के तहत मामला दर्ज किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने 2025 में उन्हें दोषी ठहराया था, मगर हाई कोर्ट ने अब पूरे मामले का मूल्यांकन कर सजा रद्द कर दी है।


