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जेल अभिरक्षा में आदिवासी नेता की मौत पर विपक्ष गरम
26-Feb-2026 4:52 PM
जेल अभिरक्षा में आदिवासी नेता की मौत पर विपक्ष गरम

विस कमेटी से जांच मांग, वाकआउट

कांग्रेस सदस्यों के सारे आरोप गलत- शर्मा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 26 फरवरी। कांकेर के आदिवासी नेता की जेल अभिरक्षा में मौत का मामला बुधवार को विधानसभा में गूंजा। विपक्षी कांग्रेस सदस्यों ने परिजनों को सूचित किए बिना रायपुर के  मेकाहारा में इलाज के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का आरोप लगाते हुए मामले की जांच विधानसभा की कमेटी से कराने की मांग की, और सदन से वाकआउट कर दिया।

प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सवाल पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने विस्तृत जवाब दिया। उन्होंने बताया कि जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक केंद्रीय और जिला जेलों में कुल 66 बंदियों की कस्टोडियल डेथ हुई है, जिनमें से 48 मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच की कार्रवाई चल रही है। उन्होंने आंकड़े देकर बताया कि कांग्रेस शासन काल में जेल अभिरक्षा में ज्यादा मौतें हुई हैं।

 

पूर्व सीएम ने कवर्धा के पंकज साहू और कांकेर के आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की मौत का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि जीवन ठाकुर को फर्जी प्रकरण में फंसाकर जेल भेजा गया था। उन्होंने कहा कि जेल में उनका समुचित इलाज नहीं हुआ, हालत गंभीर होने पर आदिवासी समाज ने चक्काजाम किया। आरोप लगाया गया कि परिजनों को बिना सूचना दिए रायपुर लाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

 

गृहमंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जीवन ठाकुर शुगर (मधुमेह) से पीडि़त थे और चिकित्सकों द्वारा उन्हें लगातार परहेज की सलाह दी जाती रही थी। मगर उनके द्वारा लगातार कोताही बरती जाती रही। इस आशय का प्रतिवेदन जेल अधीक्षक और डॉक्टर ने अदालत में भी दिया था।

उन्होंने बताया कि परिवारजनों और अन्य लोगों को मुलाकात से नहीं रोका गया। बीमारी बढऩे पर परिजनों को सूचना देकर रायपुर रेफर किया गया। गृहमंत्री ने कांग्रेस विधायक की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि जब पुलिस ने रायपुर ले जाने की जानकारी दी, तब स्वयं कांग्रेस विधायक भी मौजूद थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौत इलाज के दौरान हुई है और मामले में मजिस्ट्रियल जांच जारी है।

विपक्ष ने विधानसभा की समिति से जांच कराने की मांग दोहराई, जिस पर गृहमंत्री ने कहा कि जब मजिस्ट्रियल जांच चल रही है तो समानांतर एक और जांच का औचित्य नहीं है। इससे असंतुष्ट कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वाकआउट कर दिया।


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