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महिला आयोग ने रेरा से 50 लाख वापस कराए, कई मामलों में सुलह–समझौता और कड़े निर्देश
29-Nov-2025 12:15 PM
महिला आयोग ने रेरा से 50 लाख वापस कराए, कई मामलों में सुलह–समझौता और कड़े निर्देश

22 मामलों का निपटारा, पीड़ित महिलाओं को मिली त्वरित राहत

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर, 29 नवंबर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अगुवाई में जिला पंचायत भवन में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की जनसुनवाई आयोजित की गई। जनसुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रकरणों का समाधान हुआ। सबसे चर्चित मामले में आयोग के हस्तक्षेप से एक आवेदिका को रेरा से 50 लाख रुपए वापस मिले। राशि प्राप्त होने के बाद आवेदिका ने प्रकरण वापस लेने की इच्छा जताई, जिसके बाद मामला नस्तीबद्ध कर दिया गया।

इस जनसुनवाई में बिलासपुर के 22 मामलों की सुनवाई हुई। कई विवादों में दोनों पक्षों ने सुलह कर मामले समाप्त किए। एक मामले में कार्यस्थल पर उत्पीड़न की शिकायत पर दोनों पक्षों को बुलाकर चर्चा की गई। आरोपित ने माफी मांगी, जिसके बाद आवेदिका ने अपना आवेदन वापस लेने पर सहमति दी। इसी तरह महिला खिलाड़ियों द्वारा खेल परिसर में समय स्लॉट दिलाने की मांग पर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उचित समय देने का आश्वासन मिलने पर मामला समाप्त किया गया। एक अन्य शिकायत में उच्च अधिकारी की अनुचित टिप्पणी को लेकर सुनवाई हुई। आरोपी अधिकारी ने खेद जताया और आगे संयम बरतने का आश्वासन दिया। इस पर भी आवेदिका ने आगे कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया।

वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में आयोग ने दोनों पक्षों को 15 दिनों के भीतर सखी सेंटर में सुलह प्रक्रिया में शामिल होने का निर्देश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में समझौता नहीं होता, तो एफआईआर का मार्ग खुला रहेगा।

इसी तरह स्कूल प्रबंधन से जुड़े पुराने विवाद में स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति होते ही मामला निपटा दिया गया। वहीं, महाराष्ट्र के भंडारा जिले से जुड़े प्रकरण की जांच संबंधित सखी सेंटर को सौंप दी गई है। धोखाधड़ी के एक मामले में आयोग ने आवेदिका को दीवानी और आपराधिक प्रक्रिया दोनों मार्ग अपनाने की सलाह दी।

जनसुनवाई के बाद आयोजित प्रेसवार्ता में पत्रकारों ने डॉ. नायक से पूछा कि छह साल के कार्यकाल में आपने कितने घर जोड़े और कितने तोड़े हैं। इस पर उन्होंने कहा कि  आयोग का उद्देश्य किसी का घर तोड़ना नहीं, बल्कि रिश्तों को बचाना है। जब हिंसा और डर बढ़ जाता है, तब अलग करना मजबूरी बन जाता है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि  कई मामलों में पुरुष भी पीड़ित होते हैं, पर उनके पास अपनी बात रखने का मंच नहीं है। संतुलन जरूरी है, इसलिए पुरुष आयोग गठित करने पर विचार होना चाहिए। डॉ. नायक ने कहा कि कई मामलों में महिलाएं अब जागरूक हैं और अपने अधिकारों को लेकर आगे आ रही हैं। आयोग ने हजारों परिवारों में रिश्तों को जोड़ने का काम किया है, जबकि टूट चुके मामलों में महिलाओं को आर्थिक सहायता, कानूनी सुरक्षा और आत्मसम्मान से खड़े होने की राह दिखाई है।


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