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एमएमसी जोन के एसजेडसी मेम्बर विकास का 11 नक्सलियों संग महाराष्ट्र में समर्पण
29-Nov-2025 12:12 PM
एमएमसी जोन के एसजेडसी मेम्बर विकास का 11 नक्सलियों संग महाराष्ट्र में समर्पण

एके-47 हथियार डालता एसजेडसी मेम्बर विकास नगपुरे।


एके-47 समेत घातक हथियारों को लेकर पहुंचे दर्रेकसा दलम के 89 लाख के ईनामी नक्सली
‘छत्तीसगढ़’  संवाददाता
राजनांदगांव, 29 नवंबर।
एमएमसी जोन के दर्रेकसा दलम के नक्सलियों ने महाराष्ट्र के गोंदिया में पुलिस के समक्ष हथियार डाल दिया। मुख्यधारा में वापसी करते 11 नक्सलियों ने आत्मसर्पण किया। 

पुलिस के लिए यह कामयाबी इसलिए मायने रखती है, क्योंकि स्पेशल जोनल कमेटी (एसजेडसी) मेम्बर विकास नगपुरे ने  भी मुख्यधारा में वापसी की है। विकास एमएमसी जोन के कुख्यात नक्सलियों की सूची में शीर्ष रहा है। उसकी लंबे समय से पुलिस तलाश करती रही है। इसके अलावा  डीवीसी मेम्बर नागसु उर्फ गोलू तथा रानो उर्फ रम्मो ने भी हथियार डाले हैं। इस तरह कुल 11 नक्सलियों ने समर्पण किया है।

विकास पर सर्वाधिक 25 लाख और नागसु और रानो पर क्रमश: 16-16 लाख रुपए का ईनाम था। अन्य नक्सलियों पर 6 से 2 लाख रुपए के ईनाम थे। समर्पण से एक दिन पहले एमएमसी जोन के प्रवक्ता अनंत के रूप में विकास ने तीनों राज्य के पुलिस से 01 जनवरी 2026 तक मोहलत मांगी थी, लेकिन अचानक सभी ने गोंदिया जिले के दर्रेकसा क्षेत्र में समर्पण कर दिया। समर्पित नक्सलियों का नक्सल डीआईजी अंकित गोयल के अलावा अन्य अफसरों ने स्वागत किया। विकास ने समर्पण के दौरान एके-47 को पुलिस के हवाले कर दिया। इसी तरह एसएलआर और इंसास के अलावा अन्य हथियार भी नक्सलियों ने पुलिस को सौंप दिया।  

एमएमसी जोन में विकास को काफी शिक्षित माना जाता है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि विकास को अंग्रेजी भाषा का अच्छा ज्ञान है। इसके अलावा वह कम्प्यूटर की भी तकनीकी समझ में दक्ष है। विकास और रानो पति-पत्नी है। इस संबंध में नक्सल आईजी संदीप पाटिल ने ‘छत्तीसगढ़’  से कहा कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को शासन द्वारा निर्धारित नियमों के तहत लाभ दिया जाएगा। गोंदिया में आयोजित एक कार्यक्रम में सभी का स्वागत किया गया। वहीं मीडिया को सभी के सरेंडर के संंबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।

छत्तीसगढ़ और एमपी में समर्पण का माहौल नहीं बना
हार्डकोर नक्सली विकास के छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में समर्पण नहीं करने को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही है। बताया जा रहा है कि दोनों राज्य दर्रेकसा दलम के नक्सलियों को समर्पण के लिए उन्मुक्त माहौल बनने का विश्वास दिलाने में पीछे रह गए। पिछले दिनों बोरतलाव में हुए नक्सल-पुलिस मुठभेड़ में शहादत की घटना के कारण भी विकास और उनके साथी दोनों राज्य में समर्पण करने से बिदक गए। चर्चा है कि जिस दिन मुठभेड़ हुई, उस दिन विकास अपने साथियों के साथ कुरेझर के जंगल में समर्पण करने की योजना को अंतिम रूप देने के लिए बैठक कर रहा था। इस बीच बालाघाट पुलिस मौके पर पहुंच गई और फायरिंग में एक इंस्पेक्टर आशीष शर्मा शहीद हो गए। इस घटना के बाद से राजनांदगांव-बालाघाट की पुलिस नक्सलियों की सरगर्मी से तलाश कर रही थी। इससे पहले विकास ने महाराष्ट्र का रूख कर दोनों राज्य की पुलिस को पीछे कर दिया।


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