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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 23 अक्टूबर। डीपी विप्र कॉलेज में कार्यरत रहे बुक कीपर अरुण कश्यप को आखिरकार 17 साल बाद न्याय मिला। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कॉलेज प्रबंधन की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उच्च शिक्षा आयुक्त द्वारा दिए गए सेवा बहाली के आदेश को चुनौती दी गई थी। हालांकि, यह फैसला तब आया जब अरुण कश्यप अब रिटायर हो चुके हैं।
अरुण कुमार कश्यप डीपी विप्र कॉलेज में बुक कीपर के पद पर कार्यरत थे। 2 फरवरी 2008 को कॉलेज प्रबंधन ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। इस कार्रवाई से दुखी होकर उन्होंने उच्च शिक्षा आयुक्त, रायपुर के समक्ष अपील दायर की। अपीलीय प्राधिकारी ने उनकी अपील स्वीकार करते हुए बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया और कश्यप की सेवा बहाल करने का आदेश दिया।
आयुक्त के आदेश से असंतुष्ट कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। उनका तर्क था कि आदेश पारित करते समय उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया और यह निर्णय प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण है।
प्रतिवादी कश्यप की ओर से अधिवक्ता अनुराग दयाल ने दलील दी कि अधिनियम 1978 और नियम 1983 के तहत किसी शिक्षक या कर्मचारी को केवल निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए ही बर्खास्त किया जा सकता है। कॉलेज प्रबंधन इस प्रक्रिया का पालन करने में विफल रहा, जिससे आदेश स्वतः अवैध हो गया।
सुनवाई के बाद जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बेंच ने कहा कि किसी भी कर्मचारी की सेवा समाप्ति तभी वैध होगी जब वह नियमों के तहत तय प्रक्रिया का पालन करते हुए की जाए। अदालत ने पाया कि कॉलेज प्रबंधन ऐसा करने में असफल रहा, इसलिए उच्च शिक्षा आयुक्त का आदेश सही है।
17 साल पुराने इस विवाद का फैसला तब आया जब अरुण कश्यप सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।


