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कार्यशाला में दी गई जानकारी
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 10 अक्टूबर। बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत बिलासपुर में जल संसाधन विभाग के प्रार्थना सभा भवन में उन्मुखीकरण कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा गया। यह आयोजन जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश सिंह और महिला एवं बाल विकास अधिकारी सूर्यकांत गुप्ता के मार्गदर्शन में किया गया।
कार्यशाला में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है। इस कानून के अनुसार, ऐसा विवाह करवाने, कराने या सहयोग देने वाले को दो वर्ष की सजा या एक लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
राज्य शासन की अधिसूचना के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग के सभी बाल विकास परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षक और ग्राम पंचायत सचिवों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। कार्यशाला में गैर-सरकारी संगठन, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, मंदिर पुजारी, विवाह आयोजक, टेंट, बैंड और केटरिंग संचालक, प्रिंटिंग प्रेस प्रतिनिधि सहित कई समाजसेवी शामिल हुए। प्रतिभागियों को बताया गया कि बाल विवाह की जानकारी मिलने पर तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181, या आपातकालीन नंबर 112 पर सूचना दी जा सकती है।
कार्यक्रम में बताया गया कि ऐसे ग्राम पंचायत, जहाँ पिछले दो वर्षों में कोई बाल विवाह नहीं हुआ, उन्हें ग्राम सभा के प्रस्ताव के माध्यम से बाल विवाह मुक्त पंचायत घोषित किया जाएगा। यह प्रयास चाइल्ड फ्रेंडली पंचायत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान को 10 मार्च 2024 से पूरे राज्य में संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत जनजागरूकता और क्षमता निर्माण के लिए जिला, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम के समापन पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी सत्यनारायण राठौर ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है, जिसे जन जागरूकता और सामूहिक प्रयास से ही समाप्त किया जा सकता है। समाज के हर वर्ग की सहभागिता से ही बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ का सपना पूरा होगा। रीता बरसैया, कांतिलाल साहू, डा. उषा किरण बाजपेयी, और मनीष कश्यप (एडवोकेट) ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया।


