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-सुचित्र मोहंती
राजद्रोह क़ानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस पर विचार करने को कहा है. अदालत ने कहा है कि फिर से समीक्षा करने की प्रक्रिया जब तक पूरी नहीं हो जाती, इस क़ानून के तहत कोई भी मामला दर्ज नहीं होगा.
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि इस क़ानून के तहत किसी भी तरह की जाँच भी नहीं शुरू हो सकती.
मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने अपने आदेश में कहा है कि जो भी लोग इस क़ानून के तहत मुक़दमा झेल रहे हैं या वे जेल में हैं, वे राहत और ज़मानत के लिए अदालत जा सकते हैं. पिछले दिनों केंद्र सरकार ने इस मामले में दाख़िल हलफ़नामे में कहा था कि वो इस क़ानून की समीक्षा के लिए तैयार है. हालाँकि पहले सरकार ने ये कहा था कि ये क़ानून बहुत ज़रूरी है. जबकि अदालत ने इस क़ानून के दुरुपयोग पर चिंता जताई थी.
अदालत में बहस के दौरान जब बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि सरकार को समीक्षा के लिए कितना समय लगेगा तो उन्होंने जवाब दिया- “इसका ठीक-ठीक जवाब हम नहीं दे सकते लेकिन ये प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.”
बेंच ने कहा कि वह केंद्र सरकार के फ़ैसला लेने तक सुनवाई टालने के आग्रह को मंज़ूरी तो दे सकती है लेकिन अदालत ने इस कठोर क़ानून के दुरुपयोग को लेकर चिंता ज़ाहिर की.
जिस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि एफ़आईआर दर्ज करना राज्य की पुलिस का काम होता है ना कि केंद्र ये करता है, इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए कई तरह के उपाय हैं.
जवाब में चीफ़ जस्टिस रमन्ना ने कहा, ‘’हम सभी को अदालतों में जाने और महीनों तक जेल में रहने के लिए नहीं कह सकते. केंद्र सरकार ने खुद ही दुरुपयोग के बारे में चिंता जताई हो तो आप बताइए कि उनकी रक्षा कैसे करेंगे? हमें संतुलन बनाना होगा, कई लोग हैं जो इस कानून के तहत जेल में बंद हैं और कई ऐसे होंगे जिन पर इस कानून के तहत मामला दर्ज होने जा रहा है. कई मामले अब तक लंबित हैं. कृपया इस पर अपना रुख स्पष्ट करें.” (bbc.com)


