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सभी वारिसों की सहमति के बिना मुस्लिम अपनी संपत्ति के एक तिहाई से अधिक का वसीयत नहीं कर सकता
09-May-2022 10:26 AM
सभी वारिसों की सहमति के बिना मुस्लिम अपनी संपत्ति के एक तिहाई से अधिक का वसीयत नहीं कर सकता

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बिलासपुर 9 मई। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि अंतिम संस्कार के खर्च और ऋण के भुगतान के बाद कोई भी मुस्लिम सभी कानूनी वारिसों की सहमति के बिना अपनी संपत्ति के एक तिहाई से अधिक का वसीयत नहीं कर सकता है।

कोरिया जिले के ग्राम तरगवां की सुलक्ष्मी जायसवाल ने नूर मोहम्मद के उस वसीयत को संदेहास्पद और दोषपूर्ण बताते हुए जिला कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें पूरी संपत्ति सत्तार अली के नाम पर की गई थी। ट्रायल कोर्ट ने कहा कि वसीयत के खिलाफ कोई भी संदिग्ध परिस्थिति दिखाई नहीं देती है।

इस आदेश के विरुद्ध याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में अपील की जिसकी सुनवाई जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता के वकील की ओर से दलील दी गई कि कोई भी मुस्लिम, हनीफी ला के प्रावधान के तहत अपने अंतिम संस्कार और ऋण की अदायगी में होने वाले खर्च के बाद शेष संपत्ति के एक तिहाई से अधिक हिस्से का वसीयत नहीं कर सकता। इस मामले में नूर मोहम्मद ने अपनी पूरी संपत्ति सत्तार अली के नाम कर दी है। अधिवक्ता की ओर से पटना हाई कोर्ट के अब्दुल खान बनाम मुर्तजा खान मामले में दिए गए फैसले का उल्लेख भी किया।

जस्टिस व्यास की बेंच ने यह पाया कि नूर मोहब्बत की मृत्यु बिना किसी समस्या के हुई थी। उनके अन्य वारिस भी हैं, जो भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 65 के अनुसार संपत्ति में अधिकार रखते हैं। वसीयतनामा के पूर्व इनसे कोई सहमति प्राप्त नहीं हुई है। इसलिए मुस्लिम कानून के तहत यह वसीयतनामा निष्पादित नहीं माना जाएगा।


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