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भवन निर्माण के ठेके में भ्रष्टाचार का आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोरबा / रायपुर, 7 मई। राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के बाद कोरबा शहर जिला कांग्रेस ने भी कलेक्टर रानू साहू पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। जिला अध्यक्ष सपना चौहान ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आदिवासी विभाग के करीब 8 करोड़ के ठेके में गड़बड़ी कर शासन को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है, और कहा कि यह सब कुछ कलेक्टर और सहायक आयुक्त के संरक्षण में हुआ है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
शहर जिला अध्यक्ष ने पत्र के साथ दस्तावेज भी दिए हैं। उन्होंने बताया कि सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग कोरबा द्वारा निर्माण कार्यों के लिए विगत दो मार्च को टेंडर जारी किए गए थे जिसमें भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार किया गया है। कुल 18 भवन निर्माण के लिए ऑनलाइन टेंडर बुलाए गए थे। टेंडर में अपने चहेते ठेकेदार को फायदा पहुंचाने की नीयत से टेंडर प्रक्रिया में कई शर्तें डाल दी गई।
यह भी शर्त थी कि अमानत राशि और शपथ पत्र को स्पीड पोस्ट के जरिए निर्धारित समय पर कार्यालय में जमा करना होगा। फिर विभाग द्वारा प्राप्त दस्तावेज को सही पाए जाने पर ठेकेदार द्वारा अपलोड किए जाने वाले दस्तावेज को खोल दिए गए जिसे काम नहीं देना था उसे अयोग्य करार दिया गया जो कि नियम विरूद्ध था।
जिला अध्यक्ष ने यह भी बताया कि कुल 131 टेंडर आए थे लेकिन इसमें से 40 ही खोली गई बाकी टेंडरों को कूटरचना करके अयोग्य करार दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि आदिवासी विकास विभाग द्वारा अन्य जिलों में भी इसी प्रकार के भवन निर्माण के लिए टेंडर बुलाए गए थे लेकिन कोरबा को छोडक़र बाकी जिलों में इस तरह की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
उन्होंने बताया कि सहायक आयुक्त माया वारियार बालोद में पदस्थ रही हैं। उस समय रानू साहू बालोद कलेक्टर थीं। वहां भी दोनों अफसरों द्वारा इसी तरह भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया था। इससे सरकार को करोड़ों की क्षति हुई है। जिलाध्यक्ष ने सहायक आयुक्त को हटाकर भ्रष्टाचार के इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही 8 करोड़ के नुकसान को रोकने के लिए निर्देश देने का मुख्य सचिव से आग्रह किया है।


