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शिक्षा निदेशालय ने अपने एक आदेश में कहा है कि राजधानी के निजी स्कूल, अभिभावकों को उनसे या किसी ख़ास जगह से किताब, स्टेशनरी के दूसरे सामान और यूनिफ़ॉर्म ख़रीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते.
गुरुवार को जारी इस आदेश में कहा गया है कि स्कूल, अभिभावकों पर इस बात के लिए दबाव नहीं बना सकते हैं कि वे किताबें और दूसरी चीज़ें किसी चुनी हुई दुकान से ही ख़रीदें.
दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस संबंध में ट्वीट भी किया है.
उन्होंने लिखा है- “दिल्ली के प्राइवेट स्कूल अब पेरेंट्स को अपनी ही दुकान से किताबें और यूनिफ़ॉर्म ख़रीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे.हर स्कूल को आसपास की कम से कम 5 दुकानों की सूची जारी करनी होगी जहां से किताबें व यूनिफ़ॉर्म ख़रीदी जा सकेंगी. इस आदेश की अवहेलना करने वाले स्कूलों के ख़िलाफ़कार्रवाई की जाएगी.”
इसके अलावा निदेशालय ने आदेश दिया है कि स्कूलों को नए सत्र में कक्षा के अनुसार किताबों की सूची और राइटिंग मटीरियल की लिस्ट भी जारी करनी होगी. उन्हें ये लिस्ट स्कूल की वेबसाइट पर पहले से ही जारी करनी होगी और इसके साथ ही अभिभावकों से अलग-अलग माध्यमों से बात भी करनी होगी और उन्हें सूचित करना होगा. इसके साथ ही स्कूलों को यह भी आदेश दिया गया है कि वे आने वाले तीन सालों तक स्कूल की यूनिफ़ॉर्म में बदलाव नहीं करेंगे. (bbc.com)


