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LIC के आईपीओ की क़ीमत और समय को लेकर उठ रहे सवाल
04-May-2022 9:56 AM
LIC के आईपीओ की क़ीमत और समय को लेकर उठ रहे सवाल

इमेज स्रोत,ANI


कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर एलआईसी के मूल्यांकन और इसे बेचने में कथित जल्दबाज़ी को लेकर सवाल उठाए हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार द टेलिग्राफ ने इस ख़बर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार से सवाल किया है कि सार्वजनिक क्षेत्र की भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का मूल्यांकन फ़रवरी में 12-14 लाख रुपए था और केवल दो महीने में ये घटाकर छह लाख करोड़ रुपए कैसे कर दिया गया.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एलआईसी के आईपीओ की लॉन्चिंग से पहले सवाल किया, "हमारी आपत्ति सरकार की मंशा, उद्देश्य और तौर-तरीक़ों पर है. कम वैल्यूएशन, महत्वपूर्ण मूल्यांकन सूचकांकों पर विचार न करने, वैश्विक अनिश्चतताओं और एक अस्थिर बाज़ार होने के बावजूद एलआईसी का आईपीओ लाने की जल्दबाज़ी, इस पर सवाल खड़े करती है."

"दो महीने में कैसे घटा दिए शेयरों के दाम"
सुरजेवाला ने कहा, "अधिकांश विशेषज्ञों ने कहा है कि एलआईसी के शेयरों के दाम अब बहुत ही कम हैं. सरकार ने फ़रवरी में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में पाँच प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 70,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा था. लेकिन इसे अब घटाकर 21,000 करोड़ रुपए और हिस्सेदारी बिक्री को कम कर 3.5 प्रतिशत कर दिया गया है. सरकार ने फ़रवरी में एलआईसी का मूल्यांकन 12-14 लाख करोड़ रुपए आंका था और केवल दो महीने में इसे घटाकर छह लाख करोड़ रुपए क्यों कर दिया."

सुरजेवाला ने कहा कि इस साल फ़रवरी में जब आईपीओ के लिए प्रॉसपेक्टस जमा किया गया था, उस समय एलआईसी के विनिवेश के लिए मूल्यांकन (शुद्ध संपत्ति मूल्य जमा भविष्य में होने वाले लाभ का मौजूदा मूल्य) 2.5 गुना किया गया था, लेकिन बाद में आईपीओ का मूल्यांकन अंतर्निहित मूल्य (मूल्यांकन) का 1.1 गुना ही रखा गया.

उन्होंने कहा कि इसकी तुलना में एचडीएफ़सी लाइफ इंश्योरेंस मूल्यांकन के 3.9 गुना पर कारोबार कर रही है. एसबीआई लाइफ़ और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ़ मूल्यांकन के क्रमश: 3.2 गुना और 2.5 गुना पर कारोबार कर रही हैं.

सुरजेवाला ने ये भी कहा कि फ़रवरी से लेकर अब तक एलआईसी के शेयरों के दाम 1100 रुपए से घटाकर 902-949 रुपये प्रति शेयर कर दिए गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकारी ख़ज़ाने को 30000 करोड़ रुपए का घाटा होगा.

"देश-विदेश में प्रचार के बाद क्यों कम किया मूल्यांकन"

फ़रवरी 2020 में सरकार ने एलआईसी के पाँच फ़ीसदी शेयरों को बेचकर 75,000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा था लेकिन अब इसे घटाकर 21,000 करोड़ कर दिया गया है. सरकार अब 3.5 फ़ीसदी शेयर ही बेचेगी.

सुरजेवाला ने ये भी कहा कि पाँच फ़ीसदी शेयर बेचने के लक्ष्य को घटाकर 3.5 फ़ीसदी करने के पीछे क्या कारण है, इसकी भी कोई जानकारी नहीं दी गई. उन्होंने सवाल किया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने देश-विदेश में प्रचार के बाद अचानक एलआईसी का मूल्यांकन और निर्गम का आकार कम क्यों कर दिया.

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि सितंबर, 2021 की स्थिति के अनुसार एलआईसी के 30 करोड़ पॉलिसीधारक हैं और उसकी कुल संपत्ति 39,60,000 करोड़ रुपए (526 अरब डॉलर) है. कंपनी के पास 52,000 करोड़ रुपए के शेयर हैं.

उन्होंने कहा कि एलआईसी को अपने निवेश पर अप्रैल-सितंबर, 2021 के दौरान 3.35 लाख करोड़ रुपए की आय हुई.

सुरजेवाला ने कहा कि कंपनी हर साल तीन करोड़ पॉलिसी जारी करती है, जो प्रतिदिन एक लाख पॉलिसी बैठता है और यह दुनिया का 10वां सबसे बड़ा बीमा ब्रैंड है.

सुरजेवाला ने कहा, "आख़िर सरकार क्यों ऐसे समय एलआईसी में हिस्सेदारी बेचने जा रही है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध समेत विभिन्न कारणों से घरेलू और वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में उठा-पटक जारी है."

उन्होंने कहा, "सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के विनिवेश को देखने वाले सचिव ने कहा था कि अगर बाज़ार की स्थिति अनुकूल नहीं रही, तो सरकार सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी नहीं बेचेगी. फिर एलआईसी का आईपीओ इस नीति से अलग क्यों है? देश इसका जवाब चाहता है." (bbc.com)


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