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उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शनिवार को कहा कि सरकार पर शिक्षा के भगवाकरण का आरोप लगता है लेकिन "शिक्षा के भगवाकरण में गलत क्या है?"
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक वेंकैया नायडू ने कहा, "हम पर शिक्षा के भगवाकरण का आरोप लगता है, लेकिन भगवा में गलत क्या है? सर्वे भवन्तु सुखिनः (सभी सुखी रहें) और वसुधैव कुटुम्बकम (दुनिया एक परिवार है), जो हमारे प्राचीन ग्रंथों में निहित दर्शन हैं, आज भी भारत की विदेश नीति के मार्गदर्शक सिद्धांत हैं."
हरिद्वार में साउथ एशिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ पीस ऐंड रिकंसिलिएशन (एसएआईपीआर) के उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति नायडू भारतीयों को अपनी औपनिवेशिक मानसिकता छोड़ देनी चाहिए.
उन्होंने कहा, "औपनिवेशिक शासन ने महिलाओं सहित समाज के एक बड़े हिस्से को शिक्षा से वंचित रखा और सिर्फ छोटे से अमीर परिवारों तक ही शिक्षा सीमित रही. ये ज़रूर है कि सबको एक समान अच्छी शिक्षा मिले. केवल इसी तरह से हमारी शिक्षा का फ़ायदा सभी को मिलेगा और उसे लोकतांत्रिक बनाया जा सकेगा."
अपनी जड़ों से फिर से जुड़ने पर ज़ोर देते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा कि परिवार के बड़े लोगों को बच्चों और युवाओं के साथ अधिक समय बिताना चाहिए ताकि घर के बच्चे हमारे समृद्ध संस्कृति को समझ सकें, उसे आत्मसात कर सकें.
मातृभाषा का हमारी ज़िंदगियों में महत्व पर ज़ोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने युवाओं से उनकी मातृभाषा में बोलने उसे बढ़ावा देने का आह्वान भी किया.
उन्होंने कहा, "मैं उस दिन खुश हो जाऊंगा जब एक भारतीय अपने देशवासी से मातृभाषा में बात करे, प्रशासनिक काम मातृभाषा में हों और सारे सरकारी आदेश लोगों की भाषा में जारी हों." (bbc.com)


