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ANI
महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी की गठबंधन सरकार में शामिल होने को लेकर एआईएमआईएम ने दिलचस्पी दिखाई है लेकिन इस पर शिवसेना ने सहमति नहीं दी है.
अंग्रेज़ी अख़बार 'इकोनॉमिक टाइम्स' के मुताबिक़, हाल ही में औरंगाबाद से एआईएमआईएम सांसद इम्तियाज़ जलील राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और एनसीपी नेता राजेश टोपे से मिलने उनके घर पहुंचे थे.
टोपे की मां के देहांत के बाद वो उनसे मिलने उनके घर गए थे जिसके बाद कई कयास लगाए जाने लगे थे. हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी एआईएमआईएम के अध्यक्ष हैं. इस पार्टी पर कई राजनीतिक दल आरोप लगाते रहे हैं कि वो बीजेपी की 'बी टीम' है और मुस्लिम वोटों को बांट देने से बीजेपी को फ़ायदा देती है.
जलील ने शनिवार को कहा, "हम कहते हैं कि इसे अभी और सभी के लिए समाप्त कर देते हैं. जब मैं एनसीपी नेता से मिला तो मैंने कहा कि हम महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के साथ आने के लिए तैयार हैं. लेकिन हम जानते हैं कि शिवसेना इसको स्वीकार नहीं करेगी. हमने प्रस्ताव दिया है देखिए अब क्या होता है."
इस बयान के सामने आने के बाद शिवसेना ने इसका खंडन करते हुए कहा है कि महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार में चौथा साझेदार स्वीकार नहीं किया जाएगा.
शिवसेना सांसद संजय राउत ने एआईएमआईएम को एक बीमारी बताया है. उन्होंने कहा, "हम ऐसी किसी पार्टी के साथ गठबंधन कैसे कर सकते हैं जो औरंगज़ेब की क़ब्र के आगे झुकती हो? उसके बारे में सोचिए भी नहीं. वो एक बीमारी के समान है. शिवसेना छत्रपति शिवाजी के आदर्शों पर चलती है और भविष्य में भी ऐसा करेगी."
इसके बाद राउत ने दावा किया कि बीजेपी और एआईएमआईएम का एक ख़ुफ़िया गठबंधन है.
"आप यूपी में भी इसे देख चुके हैं. तो हम इस तरह की पार्टी से दूरी रखते हैं."
एआईएमआईएम सांसद इम्तियाज़ जलील कहते हैं, "यूपी चुनाव लड़ने के लिए हमें क्यों दोष दिया जाता है जबकि एनसीपी ने ख़ुद यूपी में चुनाव लड़ा और कांग्रेस ने 400 सीटों से अधिक पर चुनाव लड़ा तो क्या तब वोट नहीं बंटे थे."(bbc.com)


