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राज्य के 4 आईएफएस के विरुद्ध अभियोजन के लिए अनुमति का मामला-हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा
16-Mar-2022 5:21 PM
राज्य के 4 आईएफएस के विरुद्ध अभियोजन के लिए अनुमति का मामला-हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर/रायपुर, 16 मार्च।
देश के अपने किस्म के पहले मामले में आज छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति आरसीएस सामंत की पीठ ने केंद्र से, याचिकाकर्ता रायपुर के ब्यास मुनि दिवेदी की याचिका पर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि छत्तीसगढ़ वन विभाग, असम के मानस नेशनल पार्क से से एक नर और एक मादा अर्थात दो वन भैंसों को पकड़ कर लाया है, जिसके लिए पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार ने अनुमति दी थी कि वन भैसों को समुचित प्राकृतिक वास में छोड़ा जायेगा।  परंतु वन अधिकारियों ने दोनों वन भैसों को छत्तीसगढ़ के बारनवापारा अभ्यारण में बाड़े में बंधक बना रखा है, जो कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के प्रावधानों के तहत अपराध है, जिसके लिए कम से कम 3 साल जो कि 7 साल हो सकती है की सजा का प्रावधान है।

गौरतलब है कि वन भैसा, बाघ के समान ही अनुसूची-एक का वन्य प्राणी है, इनको तब तक बंधक नहीं बनाया जा सकता जब तक कि यह सुनिश्चित नहीं हो जाये कि उन को पुनर्वासित नहीं किया जा सकता, जैसे की बाघ के मामले में ऐसी चोट लगने से जो ठीक न हो सके, जिस से वह शिकार न कर सके। वन भैसों के मामले में तो केंद्र से अनुमती ही इस शर्त के साथ मिली थी कि उन्हें उचित रहवास वाले वन में छोड़ा जायेगा, फिर भी उन्हें बंधक बना रखा गया है।

दिवेदी ने बताया कि क्योंकि वन भैंसे असम से छत्तीसगढ़ लाने में 4 आई.एफ.एस.  जिम्मेदार है अत: उनके विरुद्ध अभियोजन की अनुमति पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ही दे सकता है। अत: अभियोजन के लिए उन्होंने सितंबर 2021 में अनुमति देने की मांग मंत्रालय से की थी, बाद में कई रिमाइंडर भी भेजे गए, परंतु मंत्रालय द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने पर कोर्ट से अभियोजन की अनुमति के आवेदन पर निर्णय लेने हेतु आदेशित करने की मांग की गई, जिस पर कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है।

क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ वन विभाग वर्तमान में पदस्थ प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) पीवी नरसिम्ह राव आई.एफ.एस. तथा तत्कालीन अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) वर्तमान में सदस्य सचिव बायो-डाइवर्सिटी बोर्ड अरुण कुमार पांडे, आई.एफ.एस.  के कार्यकाल में अप्रैल 2021 में असम से वन भैसा लेकर आया, जिन्हें बारनवापारा अभ्यारण में बाड़े में कैद कर रखा है, इनके विरुद्ध अभियोजन की अनुमती मांगी गई है।

पूर्व में पदस्थ सेवानिवृत्त आईएफएस प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) कौशलेंद्र कुमार सिंह ने प्लान बनाया था कि असम से पांच मादा वन भैंसों को पकड़ कर लाया जाएगा और यहां पर बंधक बनाकर उनसे प्रजनन कराया जाएगा और जो वन भैसे पैदा होंगे उन को वन में छोड़ा जाएगा। वन अधिकारी असम के वन भैसों का उदंती सीता नदी अभ्यारण में रखे गए वन भैसों से मेल करा कर नई जीन पूल तैयार करना चाहते थे। इनके विरुद्ध अभियोजन की अनुमती मांगी गई है।


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