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-हिमानी चांदना
नई दिल्ली: कोरोना महामारी एक बार फिर से पैर पसार रही है. एशिया और यूरोप के कुछ देशों में कोविड-19 मामलों में आई तेजी से चिंता बढ़ गई है. विशेषज्ञों के अनुसार, हालात हर जगह और देशों में अलग-अलग होते हैं. कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में आई तेजी का कारण ज्यादातर ओमिक्रॉन वेरिएंट और ओमिक्रॉन का सब वेरिएंट BA.2 है. इसके अलावा कोविड-19 प्रतिबंधों में तेजी से ढील देने की वजह से भी इस वायरस का संक्रमण फिर तेजी से फैला है.
भारत में कोरोना तीसरी लहर के दौरान गंभीर परिणाम देखने को नहीं मिले, क्योंकि 2021 में आई दूसरी लहर के बाद तेजी से हुए वैक्सीनेशन और मजबूत इम्युनिटी के कारण ऐसा संभव हो सका. हालांकि देश के महामारी विशेषज्ञ लगातार इस वायरस पर नजर बनाए हुए हैं और जिनोम सिक्वेंसिंग के जरिए इसके नए वेरिएंट्स को पहचानने की कोशिश कर रहे हैं.
दुनियाभर में कोरोना से जुड़े हालात
यूके और जर्मनी में ओमिक्रॉन का सब वेरिएंट BA.2 के कारण संक्रमण के नए मामलों में वृद्धि हो रही है. BA.2 50% से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार है और ब्रिटेन और चीन के साथ-साथ यूरोप के अन्य हिस्सों में भी इस वेरिएंट से जुड़े मामले बढ़ रहे हैं.
अमेरिका में बाइडेन प्रशासन में कोविड रिस्पॉन्स एफर्ट के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार एंडी स्लाविट के अनुसार, जबकि अमेरिका में मामले अभी भी कम हैं, लेकिन दो बातें चीजें गौर करने लायक हैं. “केवल 10% मामले BA.2 के हैं और चूंकि BA.2 ओमिक्रॉन की तुलना में लगभग 30% तेजी से फैलता है, इसलिए उम्मीद है कि यहां भी यूरोप जैसे हालात होंगे. चीन के शेनझेन में हेल्थ अफसर ने चेतावनी दी है कि BA.2 स्ट्रेन अत्याधिक संक्रामक है और जल्दी से फैलता है.
संक्रमण के पीछे का कारण
पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. श्रीनाथ रेड्डी के अनुसार, जीरो कोविड पॉलिसी अपनाने के बाद भी यह वायरस किसी ना किसी मोड़ पर लोगों को संक्रमित कर सकता है. उदाहरण के तौर पर चीन ने कोरोना के मामलों पर नियंत्रण पाने के लिए लगातार सख्त लॉकडाउन लगाए लेकिन फिर भी संक्रमण नहीं रुका.
चीन में इस समय डेल्टा और ओमिक्रॉन वेरिएंट का प्रसार हो रहा है. हमें यह समझने की जरूरत है कि जीरो कोविड पॉलिसी और लॉकडाउन से काम नहीं चलेगा. क्योंकि किसी एक समय पर यह वायरस आपको अपनी गिरफ्त में ले सकता है.
उन्होंने समझाते हुए कहा कि, भारत के विपरीत यूरोप में सभी प्रतिबंधों को हटा दिया गया, जहां पाबंदियों को बड़े ठोस तरीके से उठाया गया था. डेनमार्क में भी वायरस का काफी तेज संक्रमण देखा गया, लेकिन गंभीर बीमारी या मौतें देखने को नहीं मिली.
भारत अब तक कैसे रहा सुरक्षित ?
भारत में ओमिक्रॉन वेरिएंट का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ने के दो मुख्य कारण हैं. इनमें पिछले साल आई कोरोना की दूसरी लहर और टीकाकरण की तेज रफ्तार, जिसके चलते बड़ी आबादी में वायरस के खिलाफ मजबूत इम्युनिटी विकसित हुई. भारत में डेल्टा वेरिएंट की लहर अन्य देशों की तुलना में पहले देखने को मिली थी. विशेषज्ञों के अनुसार, आबादी नेचुरल वायरस के कई एंटीजन से बच गई है जो टीकों से बेहतर काम करती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि, जब तक बीमारों की संख्या कम रहती है, तब तक चिंता की कोई बात नहीं है.
आईसीएमआर के उप निदेशक समीरन पांडा का कहना है कि जरूरी नहीं है कि अन्य देशों की तरह भारत में भी कोरोना के मामले बढ़े. क्योंकि हर देश का महामारी ग्राफ अलग है.
हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स ने सावधान किया है कि, नया वेरिएंट, यदि विषाणु-जनित है- जो इसे अधिक संक्रामक और कम घातक बनाता है, तो चिंता बढ़ सकती है.
वहीं समीरन पांडा ने कहा है कि, मास्क पहनने, सामाजिक दूरी बनाए रखने, भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचने और हाथ की स्वच्छता की आदत हमें न केवल किसी भी ताजा प्रकोप से बल्कि वायु प्रदूषण और तपेदिक रोगों से भी बचाएगी.


