कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 16 जनवरी। बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा और लोककलाओं को सहेजने के उद्देश्य से जनपद पंचायत कोण्डागांव के तत्वावधान में बस्तर पंडुम 2026 बस्तर का उत्सव का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 15 से 17 जनवरी तक ऑडिटोरियम कोण्डागांव में आयोजित किया जा रहा है।
तीन दिवसीय इस उत्सव में जनजातीय नृत्य, जनजातीय गीत, जनजातीय नाट्य के साथ-साथ बस्तर वन औषधि का प्रदर्शन, जनजातीय वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन, जनजातीय वेशभूषा, आभूषण, शिल्पकला, चित्रकला, आंचलिक साहित्य, जनजातीय पेय पदार्थ एवं पारंपरिक व्यंजनों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया, जिसने दर्शकों को बस्तर की लोकसंस्कृति से रू-बरू कराया।
शुभारंभ अवसर में मुख्य रूप से नगर पालिका कोण्डागांव अध्यक्ष नरपति पटेल, जनपद पंचायत कोण्डागांव अध्यक्ष अनीता कोर्राम, उपाध्यक्ष टोमन सिंह ठाकुर, सर्व आदिवासी समाज जिला अध्यक्ष बंगाराम सोरी सहित जनप्रतिनिधि, सामाजिक पदाधिकारी, कलाकार एवं बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे।
संस्कृति संरक्षण की पहल सराहनीय
कार्यक्रम की सराहना करते हुए सर्व आदिवासी समाज जिलाध्यक्ष बंगाराम सोरी ने कहा कि केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा बस्तर के आदिवासी जनजातीय परंपरा, संस्कृति और उनसे जुड़े विविध क्षेत्रों के संरक्षण हेतु यह एक सराहनीय पहल है। इस प्रकार के आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुडऩे का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम के नाम को लेकर आपत्ति
हालांकि, कार्यक्रम की प्रशंसा के साथ-साथ बस्तर पंडुम नाम को लेकर जिलाध्यक्ष बंगाराम सोरी ने आपत्ति भी जताई। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम नाम पारंपरिक रूप से बस्तर के दक्षिणी क्षेत्र के कार्यक्रमों में प्रयुक्त होता है।
चूंकि यह आयोजन समूचे बस्तर का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इसका नाम बस्तर पंडुम के बजाय बस्तर महोत्सव या कोई अन्य सर्वस्वीकृत नाम होना चाहिए था। उन्होंने अपेक्षा जताई कि भविष्य में ऐसे आयोजनों के नामकरण में बस्तर की सांस्कृतिक विविधता और सभी क्षेत्रों की भावनाओं का ध्यान रखा जाएगा। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया और बस्तर की लोकपरंपरा को मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत किया।


