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संगीत विवि में दो दिनी राष्ट्रीय सम्मेलन
12-Jan-2026 3:51 PM
संगीत विवि में  दो दिनी राष्ट्रीय सम्मेलन

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

खैरागढ़, 12 जनवरी। इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा परिवार का राष्ट्रीय एकता में अवदान विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ 9 जनवरी को किया गया। दरबार हॉल में आयोजित उक्त सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति  प्रो.डॉ.लवली शर्मा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. राजन यादव ने की। मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात भाषाविद(डॉ.चित्तरंजन कर उपस्थित रहे।

 कार्यक्रम की शुरुवात मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया तत्पश्चात अतिथियों के स्वागत के बाद व्याख्यान शुरू हुआ। कार्यक्रम में स्वागत भाषण संयोजक डॉ. कौस्तुभ रंजन ने दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते  कुलपति ने कहा कि यह सम्मेलन एक बेहतर मौका है भारतीय भाषाओं को समझने का। भारतीयता को सार्थक बनाने में भाषा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह भाषा का सौंदर्य है और सभी भाषाएं अपने में प्रिया है। यहां भाषा के माध्यम से ही किसी स्थान राज्य की संस्कृति झलकती है। भारतवर्ष विविधताओं का देश है, भारत हमारी भाषाओं को विभिन्न तरह से परिमार्जित करने की क्षमता रखने वाला देश है।

इस संगोष्ठी से हमें यह जानने को मिलेगा की भारतीय भाषा में कितने पक्ष या पहलू हैं। मुख्य वक्ता प्रो.डॉ. चित्तरंजन कर ने भारत देश की विभिन्न भाषा शैलियों का विस्तृत वर्णन करते हुए सभी श्रोताओं को इन भाषाओं की विशेषताओं से अवगत कराया। इसके साथ ही प्रथम दिन देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंचे विद्वानो ने  ‘भारतीय भाषाओं की राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में भूमिका ’ पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

प्रमुख वक्ताओं में प्रख्यात लेखक प्रो.  परिहार तथा जाने-माने लेखक डॉ. रमेश अनुपम शामिल हुए। व्याख्यान पश्चात संध्या बेला विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में संस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई।

सर्वप्रथम डॉ. दीपशिखा पटेल के निर्देशन में लोक संगीत के विद्यार्थियों ने पंजाब का भांगड़ा, गुजरात का गरबा व छत्तीसगढ़ के बैगा लोक नृत्य के साथ विभिन्न प्रांतों के नृत्यों की प्रस्तुति दी।

 इसके बाद डॉ. एस. मेदिनी होंबल के निर्देशन में भरतनाट्यम के विद्यार्थियों ने भरतनाट्यम नृत्य की प्रस्तुति दी जिसमें अलारितु और राग नट भैरवी सहित अन्य नृत्य शामिल रहे।


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