अंतरराष्ट्रीय
-पाब्लो उचोआ
ये 15 अप्रैल के आस-पास की बात है. मॉस्को घूम रहा सैलानियों का एक जत्था अपने आगे के कार्यक्रम की रूपरेखा बना रहा था. उनके कार्यक्रम में एक ऐसी जगह का भी जिक्र था, जिसे घूमने-फिरने के लिहाज़ से अजीब माना जा सकता था.
वे एक प्राइवेट मेडिकल क्लिनिक जाने वाले थे. इन सैलानियों की दिलचस्पी मॉस्को के विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्रों में नहीं थी बल्कि वे रूस की बहुप्रचारित कोविड वैक्सीन 'स्पुतनिक वी ' चाह रहे थे.
सैलानियों के इस समूह में ज़्यादातर लोग जर्मनी के थे. ये लोग अपने घर में कोविड वैक्सीनेशन की सुस्त रफ़्तार को लेकर निराश थे. इन्हीं लोगों में से एक इनो लेंज भी थे.
बर्लिन के रहने वाले इनो लेंज ने बीबीसी को बताया, "जर्मनी में आने वाले समय में मुझे वैक्सीन मिलने की कोई उम्मीद नहीं थी. जब मैंने अपने डॉक्टर से पूछा कि मेरी बारी कब आएगी तो उन्होंने जवाब दिया, अक्टूबर या नवंबर में शायद. वो भी वैक्सीन की पहली खुराक के लिए. "
रूस में 'स्पुतनिक वी' हर किसी को फ्री में दी जा रही है. हालांकि सैलानियों को अपनी मेडिकल अप्वॉयंटमेंट के लिए 240 डॉलर से 265 डॉलर के बीच भुगतान करना पड़ रहा है.
नॉर्वे की ट्रैवल एंट टूअर कंपनी 'वर्ल्ड विजिटर' रूस के लिए इन 'वैक्सीनेशन ट्रिप्स' का आयोजन करती है. इसमें सैलानियों की हर ज़रूरत का ख्याल रखा जाता है जैसे मेडिकल क्लीनिक से लेकर वैक्सीनेशन तक के अप्वॉयंटमेंट्स और उनके आने-जाने से लेकर ठहरने तक का इंतजाम.
ये कंपनी वैक्सीन के हर खुराक के लिए दो बार आने-जाने और ठहरने तक पैकेज ऑफ़र करती है और अगर कोई सैलानी दूसरी खुराक तक के लिए रूस में ही रुकना चाहे तो उसका भी इंतज़ाम किया जाता है.
रूस आने वाले लोगों को रैपिड कोविड टेस्ट का एक सर्टिफिकेट देना होता है जो निगेटिव होना चाहिए और ये टेस्ट रिपोर्ट 72 घंटे से ज़्यादा पुराना नहीं होना चाहिए. रूस में बाहर से आए लोगों के लिए क्वारंटीन का कोई प्रावधान नहीं है.
ट्रैवल एंट टूअर कंपनी के मालिकों में से एक अल्बर्ट सिगल ने बीबीसी को बताया कि 43 सैलानियों का पहला जत्था 16 अप्रैल को रूस पहुंचा था और उसके बाद से वे 600 से ज़्यादा बुकिंग्स ले चुके हैं.
'कन्फ्यूज़ कर देने वाले नियम'
इनो लेंज 'बर्लिन स्टोरी' म्यूज़ियम के डायरेक्टर हैं. वे इराक़ के कुर्दिस्तान की नियमित रूप से यात्रा करते हैं जहां कोरोना संक्रमण के मामले बहुत ज्यादा हैं. वे बताते हैं कि शरणार्थियों के लिए सहायता कार्य भी उनका एक काम है.
हालांकि जर्मनी में मानवीय सहायता से जुड़े लोगों को वैक्सीन में प्राथमिकता दिए जाने का प्रावधान किया गया है लेकिन इनो लेंज का कहना है कि वैक्सीन उन्हें इसलिए नहीं मिला क्योंकि ये काम वे वॉलंटियर के रूप में करते हैं.
इनो लेंज बताते हैं, "नियम कभी-कभी बहुत अजीब होते हैं. मुझे वैक्सीन नहीं मिला." इनो लेंज ने जब मॉस्को के लिए बुकिंग कराई थी तब तक उनके 70 वर्षीय पिता को भी वैक्सीन नहीं मिल पाया था.
उनका कहना है कि जर्मनी में वैक्सीन देने की प्राथमिकता सूची को लेकर दिक्कत नहीं है पर इससे टीकाकरण की प्रक्रिया असामान्य रूप से सुस्त हो जाती है.
हालांकि वैक्सीन देने में इस तरह के कथित 'असंतुलन' को लेकर दुनिया भर में शिकायतें हैं. लेकिन जिन लोगों के पास पैसा है, उनके पास कहीं जाकर वैक्सीन लेने का विकल्प भी है.
ऐसे ठिकानों की लिस्ट में सर्बिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और यहां तक कि मालदीव जैसे देशों के नाम भी हैं.
मालदीव सैलानियों के लिए ट्रैवल पैकेज की योजना पर भी काम कर रहा है जिसमें यात्रियों को 'थ्रीवी' यानी 'विजिट, वैक्सीनेशन और वैकेशन' की पेशकश की जा रही है. यानी मालदीव आएं, वैक्सीन लगवाएं और छुट्टियां मनाएं.
मालदीव के पर्यटन मंत्रालय ने बीबीसी को एक ईमेल में बताया, "जब दुनिया बंद है तो 'थ्रीवी' कैम्पेन मालदीव आने का फैसला करने वाले सैलानियों की प्रतीकात्मक रूप से सराहना करने जैसा है ताकि जब वे यहां से घर लौटें तो कह सकें कि वे वैक्सीन सर्टिफिकेट लेकर आए हैं."
"हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारे द्वीप भौगोलिक रूप से अलग-थलग हैं. हमारे रिजॉर्ट्स में अच्छे स्टैंडर्ड का कोविड प्रोटोकॉल लागू किया जाता है."
सर्बिया हाल तक विदेशी लोगों को बचे हुए अतिरिक्त कोविड वैक्सीन की खुराक दे रहा था लेकिन सरकार ने अपनी आबादी को टीकाकरण में प्राथमिकता देने के मकसद से इस पर रोक लगा दी है.
इस बीच, अमेरिका जहां कैलिफोर्निया, टेक्सास और न्यूयॉर्क में बड़ी संख्या में अप्रवासी और बिना वैध दस्तावेज़ों के रह रहे लोग हैं, अचानक वैक्सीन लेने की कोशिश करने वालों की संख्या बढ़ गई है.
इनमें कनाडा और लातिन अमेरिका से आए लोग हैं जो यहां वैक्सीनेशन और क्वारंटीन के आसान नियमों का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन इसे लेकर विवाद भी हो रहा है.
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फ्लोरिडा में बहुत सारे धनी अमेरिकी और विदेशी लोग रहते हैं. यहां 65 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन में प्राथमिकता दी जा रही है और ये नहीं देखा जा रहा है कि वे कहां के रहने वाले हैं.
पिछले दिनों मेक्सिको के 73 वर्षीय टीवी प्रेज़ेंटर जुआन जोस ओरिगेल ने ट्विटर पर अपने 13 लाख फॉलोअर्स को बताया कि वे मयामी में कोविड वैक्सीन पाकर कितना खुश और निश्चिंत महसूस कर रहे हैं.
उन्होंने ट्विटर पर जनवरी में कहा, "शुक्रिया अमेरिका. कितने दुख की बात है कि मेरे देश ने मुझे ये सुरक्षा नहीं दी."
उस समय तक जुआन जोस ओरिगेल के देश में मेडिकल स्टाफ़ और फ्रंटलाइन वर्कर्स को कोरोना का टीका नहीं मिल पाया था.
'नैतिकता का सवाल'
लेकिन जो लोग वैक्सीन पर्यटन को लेकर सोशल मीडिया पर डींग हांक रहे हैं, उनकी चौतरफा आलोचना भी हो रही है.
ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़ी संस्था 'ग्लोबट्रेंडर' ने सबसे पहले 'वैक्सीन वीआईपी' वाला जुमला उछाला. ये जुमला 'नई नस्ल के उन अभिजात्य सैलानियों' के लिए कहा गया था जो 'वैक्सीन की कतारों में सबसे आगे वाली जगह खरीदना चाहते' हैं.
दुनिया भर में वैक्सीन के वितरण को लेकर जिस तरह की गैरबराबरी का माहौल है, उसे देखते हुए 'ग्लोबट्रेंडर' ने इस चलन पर 'नैतिकता का सवाल' उठाया है.
जनवरी में ये बात सामने आई कि लंदन की जानीमानी ट्रैवल एजेंसी 'नाइट्सब्रिज सर्कल' दुबई के लिए लग़्जरी वैक्सीन होलीडे ट्रिप ऑफ़र कर रहा था. इसके लिए 40 हज़ार पाउंड में बुकिंग ली जा रही थी. भारतीय मुद्रा में ये रकम 41 लाख रुपये से ज़्यादा की बनती है.
लेकिन ये सेवा 'नाइट्सब्रिज सर्कल' के सदस्यों के लिए ही ख़ास तौर पर रिजर्व थी जिन्होंने कंपनी की ट्रैवल और लाइफ़स्टाइल सर्विस के लिए 25 हज़ार पाउंड चुकाए थे.
'नैतिक रूप से कुछ भी गलत नहीं'
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि दुनिया भर में महामारी की व्यापकता को देखते हुए स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड वैक्सीन देने में प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
इसके अलावा डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के मुताबिक़ बुजुर्गों और वैसे लोग जिन्हें ज़्यादा संक्रमण का ज़्यादा खतरा है, उन्हें तरजीह दी जानी चाहिए.
अनिवार्य सेवाओं से जुड़े लोग जिन्हें यात्राएं करनी होती हैं, उन्हें भी इस प्राथमिकता सूची में जोड़ा जा सकता है. इसके अलावा डब्ल्यूएचओ का ये भी कहना है कि स्थानीय स्तर पर संक्रमण के मामले बढ़ने की सूरत में वैक्सीन की पर्याप्त सप्लाई का इंतजाम रखा जाना चाहिए.
हालांकि जो देश अपने यहां आने वाले सैलानियों को वैक्सीन का ऑफ़र दे रहे हैं, उनके यहां ऐसा नहीं लगता कि सप्लाई को लेकर कोई दिक्कत है.
सर्बिया की प्रधानमंत्री एना बर्नाबिक ने कहा कि उनके देश में वैक्सीन की हज़ारों खुराक अगर विदेशी लोगों को ऑफ़र नहीं की गई होती तो वो बर्बाद हो जाती. सर्बिया में बहुत से लोग अभी भी वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर सशंकित हैं.
मालदीव में आधी से ज़्यादा आबादी को कोविड वैक्सीन की पहली खुराक मिल चुकी है. पर्यटन उद्योग से जुड़े 99 फीसदी लोग वैक्सीन ले चुके हैं.
इस बीच रूस में लोग स्पुतनिक वी वैक्सीन ज़्यादा से ज्यादा संख्या में लें, इसे बढ़ाने के लिए सरकार संघर्ष करती हुई दिख रही है. आंकड़े बताते हैं कि रूस में केवल आठ फीसदी लोगों ने ही वैक्सीन की पहली खुराक ली है. रूस की वैक्सीन दुनिया के 60 से भी ज्यादा देशों मं दी जा रही है.
मॉस्को के लिए टूअर सर्विस देने वाले अल्बर्ट सिगल कहते हैं कि इसमें 'नैतिक रूप से कुछ भी गलत नहीं' है क्योंकि रूस में स्पुतनिक वी वैक्सीन हर किसी के लिए उपलब्ध है और किसी को भी इससे वंचित नहीं रखा जा रहा है.
ट्रैवल एंड टूअर कंपनी 'वर्ल्ड विजिटर' की वेबसाइट पर लिखा है कि वैक्सीन ट्रिप का खर्च उठाने में सक्षम जर्मन लोगों के लिए ये टीकाकरण की कतार में एक कदम आगे बढ़ाने जैसा है.
अल्बर्ट सिगल कहते हैं कि ये वैक्सीन ट्रिप उनके कारोबार के लिए संजीवनी की तरह हैं क्योंकि कुछ आस बंधी है. महामारी के कारण उनका व्यापार पहले से मंदा चल रहा था.
वो कहते हैं, "पिछले साल हमारा काम पूरी तरह से बंद रहा है. इसलिए हमारे सामने ये विकल्प था कि हम या तो चुपचाप बैठे रहें या फिर वैक्सीन ट्रिप का आयोजन करें. हम हर महीने 1800 लोगों को समय से पहले वैक्सीन दिलवाने में मदद कर रहे हैं. इस महामारी में ये बड़ी बात नहीं है लेकिन इसमें हमारा फायदा है." (bbc.com)


