गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजिम, 15 जून। प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में 6 जून से 12 जून तक आयोजित हिमाचल प्रदेश के शैक्षणिक एवं पर्यावरणीय अध्ययन भ्रमण ने पर्यावरण संरक्षण,जैव विविधता संवर्धन,सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा शिक्षा नवाचार के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।
छत्तीसगढ़ से 26 सदस्यीय टीम ने कुल्लू,मनाली,रोहतांग दर्रा,अटल टनल,सोलन सहित विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कर हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र, स्थानीय संस्कृति, जैव विविधता एवं सतत विकास के विविध आयामों का अध्ययन किया।इस अध्ययन यात्रा का नेतृत्व प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा छत्तीसगढ़ के संरक्षक लखन लाल साहू द्वारा किया गया, जबकि पर्यावरण विशेषज्ञ एवं व्याख्याता मनीष कुमार अहीर ने पूरी यात्रा के दौरान पर्यावरणीय अध्ययन, जैव विविधता अवलोकन तथा शैक्षणिक गतिविधियों का मार्गदर्शन किया। टीम के सदस्यों ने विभिन्न स्थलों पर स्थानीय समुदायों, शिक्षकों,किसानों एवं विशेषज्ञों से संवाद कर पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा के सफल मॉडलों को समझा.यात्रा के दौरान टीम ने व्यास नदी के तटीय पारिस्थितिकी तंत्र का अध्ययन किया तथा हिमालयी नदियों की स्वच्छता, जल संरक्षण और जलीय जैव विविधता के महत्व को जाना। कुल्लू-मनाली क्षेत्र में देवदार,चीड़, सेब बागानों, पर्वतीय कृषि प्रणालियों एवं स्थानीय वन्य जैव विविधता का अवलोकन किया गया। स्थानीय किसानों से चर्चा कर सीढ़ीदार खेती, जल संरक्षण तकनीकों तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली की जानकारी प्राप्त की गई।रोहतांग दर्रा एवं अटल टनल के अध्ययन ने प्रतिभागियों को उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी, ग्लेशियरों, जलवायु परिवर्तन तथा आधुनिक इंजीनियरिंग और पर्यावरणीय संतुलन के बीच सामंजस्य को समझने का अवसर प्रदान किया। टीम ने हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते पर्यावरणीय दबावों और संरक्षण की चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया।
हिमाचल भ्रमण के पश्चात जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) सोलन में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं शिक्षक सम्मेलन में प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा छत्तीसगढ़ की टीम ने अपने अध्ययन अनुभवों, पर्यावरण शिक्षा, विद्यालय आधारित इको क्लब गतिविधियों, जैव विविधता संरक्षण तथा विद्यार्थियों को प्रकृति से जोडऩे के नवाचारी प्रयासों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षकों एवं शिक्षाविदों के साथ शिक्षा नवाचार, अनुभव साझा करने तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान के सत्र आयोजित किए गए, जिससे प्रतिभागियों को एक-दूसरे की कार्यप्रणालियों और नवाचारों को जानने का अवसर मिला।
संरक्षक लखन लाल साहू ने कहा कि प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा का उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ प्रकृति आधारित अनुभवात्मक शिक्षा से जोडऩा है, ताकि वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति अधिक संवेदनशील बन सकें। वहीं मनीष कुमार अहीर ने कहा कि इको क्लब, युवा समूह, रेडक्रॉस एवं विद्यालय आधारित गतिविधियाँ विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रकृति प्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने का प्रभावी माध्यम हैं।
पूरन लाल साहू ने कहा कि यह यात्रा केवल एक शैक्षणिक भ्रमण नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, शिक्षा नवाचार और राष्ट्रीय एकता के प्रति सामूहिक संकल्प का प्रतीक बनी। हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर, सांस्कृतिक विविधता और शैक्षणिक अनुभवों से प्राप्त सीख को छत्तीसगढ़ के विद्यालयों तक पहुंचाने का संकल्प लेकर टीम वापस लौटी, जिससे आने वाली पीढिय़ों को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनाया जा सके। शैक्षणिक भ्रमण के दौरान छत्तीसगढ़ टीम के लखन लाल साहू,मनीष कुमार अहीर,भुवनेश्वर मरकाम, बृजलाल मंडावी,कुमार मंडावी,पूरन लाल साहू, आत्माराम साहू,नीलिमा गौतम,क्षमा उइके, रेणु प्रधान, संतोषी डनसेना,रजिया अंजुम शेख मुजिम शेख, जागृति मीरे, रविराज मीरे,अर्पित मीरे,उमेश्वरी साहू,उषा किरण मंडावी,अनिता मंडावी, हेमलता मरकाम,भूयांश मंडावी,खुशबू साहू विक्रमादित्य साहू, गीतिका साहू उपस्थित थे।


