गरियाबंद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नवापारा-राजिम, 15 जून। नगर के प्रतिष्ठित पीएम श्री शासकीय हरिहर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के वर्ष 1995 बैच के छात्रों ने शिक्षक सम्मान एवं मित्र मिलन समारोह का किया। 31 वर्षों बाद साथ पढ़े सहपाठियों से मिलकर छात्र जीवन की यादें एक बार फिर तरोताजा हो गई।
छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों के साथ साथ झारखंड एवं मध्यप्रदेश से दोस्त समारोह में शामिल होने नवापारा नगर में एकत्रित हुए थे। पुराने मित्रों से मिलकर सभी छात्र अपनी स्कूल जीवन की यादों में खो गए। उन्हें यह भी अहसास नहीं रहा कि वर्तमान में इंजीनियर,चिकित्सक,चार्टर्ड अकाउंटेंट, शिक्षक या राजनीति के उच्च शिखर पर आसीन है। ऐतिहासिक एवं यादगार समारोह में स्वयं को एक बार फिर से 1995 बैच का छात्र के रूप में एक दूसरे से मिलकर भावुक हो गए। पूरे दिन के लिए आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत मां सरस्वती की पूजा वंदन एवं राष्ट्रीय गीत से आरम्भ हुई। सभी छात्रों के परिचय पश्चात बाइक रैली के माध्यम से छात्र शासकीय हरिहर स्कूल पहुंचे। प्राचार्य फाखरा खानम दानी को पुष्प गुच्छ देकर अभिनंदन किया गया। स्कूल भ्रमण एवं अपनी कक्षाओं के डेस्क बेंच में दोस्तों के साथ बैठकर स्कूल के दिन की यादों को तरोताजा किया। सभी छात्रों ने स्कूल के प्रांगण में वर्तमान प्राचार्य एवं दोस्तों के साथ बैठकर ग्रुप फोटो खिंचवाना जीवन का अमूल्य धरोहर बताया। गुरुजनों का सम्मान एवं आशीर्वाद के लिए शाम चार बजे कार्यक्रम आयोजित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य आर बी शर्मा, विशेष अतिथि एन के शर्मा, तात्कालीन प्राचार्य फाखरा खानम दानी, शिक्षक एम एल साहू, आर एल साहू, एस आर सोन ने अपने उद्बोधन में हरिहर स्कूल के छात्रों में अनुशासन एवं संस्कारों की खूब प्रशंसा की। एवं सभी छात्रों के उज्जवल भविष्य एवं सुखमय जीवन की शुभकानाएं दी। पूर्व छात्रों ने बाइक रैली निकालकर मित्रता, एकता एवं आपसी प्रेम का दिया संदेश हरिहर स्कूल के पूर्व छात्रों ने नगर में बाइक रैली निकाल कर समाज को मित्रता एकता और आपसी प्रेम का संदेश दिया है। बाइक रैली के दौरान उन्होंने लोगों को यह संदेश दिया कि समय पहले ही बदल गया लेकिन विद्यार्थी जीवन में बने रिश्ते और मित्रता की डोर कभी कमजोर नहीं होती।
पुनर्मिलन समारोह के दौरान पुराने सभी साथी एक दूसरे के गले मिले, बीते दिनों को याद किया और स्कूल के दिनों को बिताया गया सुखद पलो को साझा किया। किसी ने कक्षा की शरारतों को याद किया तो किसी ने शिक्षकों की मार्गदर्शन और अनुशासन की चर्चा की।


