दुर्ग

भिलाई भाजपा में बगावत, भाजयुमो के 10 मंडल अध्यक्षों ने दिखाई ताकत, जिला अध्यक्ष ने बनाई दूरी
21-Apr-2026 7:40 PM
भिलाई भाजपा में बगावत, भाजयुमो के 10 मंडल अध्यक्षों ने दिखाई ताकत, जिला अध्यक्ष ने बनाई दूरी

‘छत्तीसगढ़’ संवाददात

भिलाई नगर, 21 अप्रैल। भिलाई में भारतीय जनता युवा मोर्चा के भीतर चल रहा अंतर्कलह अब एक बड़े संगठनात्मक संकट में बदल गया है। संगठन में गुटबाजी और असंतोष उस समय सार्वजनिक हो गई, जब भिलाई के 13 में से 10 मंडलों के अध्यक्षों ने जिला नेतृत्व को दरकिनार करते हुए अपनी अलग समानांतर सत्ता का प्रदर्शन किया।

आज भाजपा कार्यालय में उस वक्त स्थिति असहज हो गई, जब 10 मंडल अध्यक्ष अपने द्वारा चयनित पदाधिकारियों की सूची लेकर पहुंचे। कल 20 अप्रैल इन अध्यक्षों ने अपनी पसंद के पदाधिकारियों की एक स्वतंत्र सूची जारी की थी। आज की बैठक का मुख्य उद्देश्य इन नवनियुक्त पदाधिकारियों को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण कराना और उन्हें आगामी गतिविधियों के लिए सक्रिय करना था।

बड़े चेहरों की अनुपस्थिति ने खड़े किए सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात जिला नेतृत्व की गैरमौजूदगी रही। बैठक के दौरान जहां पुरुषोत्तम देवांगन भाजपा जिला अध्यक्ष नदारद रहे वहीं ?सौरभ जायसवाल भाजयुमो जिला अध्यक्ष भी बैठक में शामिल नहीं हुए।

वरिष्ठ नेताओं की यह अनुपस्थिति इस बात की पुष्टि करती है कि जिले में संगठन दो फाड़ हो चुका है। एक ओर निर्वाचित मंडल अध्यक्ष अपनी स्वायत्तता की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर जिला नेतृत्व इसे अनुशासनहीनता के तौर पर देख रहा है।

विवाद की जड़ - क्यों

भडक़ी बगावत?

सूत्रों के अनुसार, कार्यकर्ताओं और मंडल अध्यक्षों के बीच लंबे समय से पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर नाराजगी थी। मंडल अध्यक्षों का आरोप है कि जिला स्तर पर नियुक्तियां करते समय स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है।

 युवा मोर्चा के लिए मंडल स्तर पर मंगाए गए सभी सक्रिय नामों पर विचार नहीं करते हुए मनमाने अपनी मर्जी से पद बांट दिए गए। ऐसे ऐसे लोगों को मंडल का नेतृत्व सौंप दिया गया जिसे भाजपा मंडल पदाधिकारी ही नहीं जानते और न ही वो लोग कभी संगठन में सक्रिय रहे। इसी के विरोध में 10 मंडलों ने एकजुट होकर अपनी समानांतर सूची तैयार कर ली है।

मंडल अध्यक्षों का कहना है कि संगठन के कार्यक्रमों और दिशा निर्देशों का जमीनी स्तर पर पालन करवाने सक्रिय कार्यकर्ताओं की अहम जरूरत होती है। जिलाध्यक्ष द्वारा मंडल स्तर पर अपनी मर्जी से पदाधिकारी थोपने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी है, ऐसे में मंडल कार्य कैसे कर सकेगा?

आगे की रणनीति और प्रभाव

मंडल स्तर के बागी नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। वे अपनी समानांतर संरचना को औपचारिक रूप देने की तैयारी कर रहे हैं।

दूसरी तरफ स्थानीय भाजपा के वरिष्ठों का मानना है कि भिलाई जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र में भाजयुमो की यह गुटबाजी आने वाले चुनावों में पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। यदि प्रदेश नेतृत्व ने जल्द ही हस्तक्षेप नहीं किया तो यह असंतोष भाजपा के कैडर को भी प्रभावित कर सकता है।


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