दुर्ग

मनुष्य का शरीर पानी के बुलबुले के समान क्षणभंगुर है-श्रीश्वरी देवी
06-Jan-2026 8:55 PM
मनुष्य का शरीर पानी के बुलबुले के समान क्षणभंगुर है-श्रीश्वरी देवी

वैशाली नगर में 14 दिनी दिव्य प्रवचन का शुभारंभ
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भिलाई नगर, 6 जनवरी।
वैशाली नगर कालीबाड़ी प्रांगण में 5 से 18 जनवरी तक दिव्य दार्शनिक प्रवचन के प्रथम दिवस सुश्री श्रीश्वरी देवी ने मैं कौन, मेरा कौन? के उत्तर में बताया कि केवल मनुष्य ही ऐसा जीव है जो ईश्वर को जानकर माया से उत्तीर्ण हो सकता है।

दिव्य प्रवचन के प्रथम दिवस उन्होंने मानव देह के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वेद, रामायण, पुराण, गीता, गुरुग्रंथ साहिब आदि ग्रंथों से प्रमाण देते हुए कहा कि चौरासी लाख प्रकार के जीवों में मनुष्यों का शरीर ही सबसे श्रेष्ठ है। इस मनुष्य शरीर को पाने के लिए स्वर्ग के देवी–देवता भी तरसते हैं। इसका कारण उन्होंने बताया कि मनुष्य का शरीर ज्ञान प्रधत्व और पुरुषार्थ युक्त है। अर्थात इस मनुष्य शरीर से किए गए कर्म का फल मिलता है। मनुष्य शरीर से अच्छा कर्म करके स्वर्ग, बुरा कर्म करके नर्क, दोनों न करके मोक्ष एवं भक्ति करके परमानन्द प्राप्त कर सकते हैं। किंतु अन्य योनियों में किए गए कर्मों का फल नहीं मिलता। अत: जीव के लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता।

उन्होंने बताया कि देवता भी जीव हैं, जो पुण्य कर्म करके स्वर्ग प्राप्त करते हैं और पुण्य के अनुपात में स्वर्ग का भोग करके पुन: उन्हें मृत्युलोक में आना पड़ता है।
मनुष्य शरीर की विशेषता के साथ-साथ इसकी एक कमी पर भी प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि मनुष्य का शरीर पानी के बुलबुले के समान क्षणभंगुर है, कब छिन जाए इसका कोई भरोसा ही नहीं है। अत: ऐसा दुर्लभ मनुष्य शरीर प्राप्त करके हमें तत्काल मानव जीवन के लक्ष्य, भक्ति के परमानंद को प्राप्त करने में लग जाना चाहिए अन्यथा पशु, पक्षी, कीट, पतंगों की हीनतर योनियों में करोड़ों जन्मों तक भटकना पड़ेगा।
 


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