दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
भिलाई नगर, 14 दिसंबर। रिसाली के वीआईपी नगर शिव मंदिर के पास आयोजित त्रिवेणी ज्ञान यज्ञ सप्ताह के दौरान शनिवार को कथा वाचक पंडित भूपत नारायण शुक्ल अमोरा बेमेतरा वाले ने राधा रासमिलन व रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया।
श्रीमद्भागवत में राधा व रुकमणि प्रसंग प्रेम व आध्यात्मिक मिलन का प्रतीक है। राधा-कृष्ण रास का श्रद्धालुओं ने जमकर आनंद लिया। इस दौरान रुक्मिणी विवाह की सजीव झांकी सजाई गई। राधा-कृष्ण ने रास लीला व रुकमणि विवाह के दौरान भक्त थिरक उठे। इस अवसर पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे अपनी पत्नी के साथ उपस्थित थे द्य
कथा वाचक पंडित भूपत नारायण शुक्ल ने बताया कि श्रीमद्भागवत में राधा का नाम सीधे तौर पर नहीं आता, लेकिन प्रत्येक शब्द राधा से ही ओत-प्रोत माना जाता है। भागवत भक्ति का ग्रंथ है और राधा उस भक्ति का मूल हैं। भागवत कथा में राधा-कृष्ण का रास-मिलन, दिव्य प्रेम और आध्यात्मिक मिलन का प्रतीक है, जहाँ कृष्ण अपनी प्रिय राधा और गोपियों के साथ रासलीला करते हैं, जो भक्तों को आनंद और प्रेम का अनुभव कराता है; यह मिलन संकेत नामक स्थान पर शुरू हुआ माना जाता है और भागवत में अप्रत्यक्ष रूप से वर्णित है, लेकिन सभी लीलाएं राधा से ही ओत-प्रोत हैं, जो भक्ति का चरम रूप दर्शाती हैं।


