दुर्ग
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 11 दिसंबर। ग्राम चंगोरी में आधा सैकड़ा किसानों के धान के पंजीकृत रकबा में भारी त्रुटि होने से किसान परेशान हैं। कई किसानों द्वारा बोए गए धान के कुल रकबा आधे से भी कम दर्ज कर दिया गया है, जिसकी वजह से किसान अपना धान समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पा रहे हैं।
ग्राम के कृषक हेमशंकर देशमुख ने बताया कि उनके परिवार में बिसौहा देशमुख के नाम 5 एकड़ कृषि भूमि है इसे 54 आरे अर्थात लगभग डेढ़ एकड़ दर्ज कर दिया गया है। वहीं विष्णु प्रसाद देशमुख के नाम दर्ज पांच एकड़ जमीन को 64 आरे बताया जा रहा है। उनके खुद के नाम दर्ज ढाई एकड़ कृषि भूमि से 57 डिसमिल काट दिया गया है।
उनका कहना है कि ग्राम की लगभग डेढ़ सौ किसानों के पंजीकृत रकबा में भी त्रुटि है। इसमें सुधार के लिए उन्होंने 29 नंवबर को आवेदन दिया गया था मगर सुधार के बाद जो सूची आई है इसमें भी 54 किसानों के रकबे में भारी त्रुटि है। इसमें उनकी भी कृषि भूमि शामिल है। इसी प्रकार ग्राम के कृषक धरम देशमुख ने बताया कि उनके खसरा नंबर 621, 250, 255 एवं 1501 के कृषि भूमि में धान का कुल रकबा 12 एकड़ 65 डिसमिल है मगर पंजीकृत रकबे में मात्र 10 एकड़ बताया जा रहा है। इसी प्रकार मुकुंद देशमुख ने बताया कि उनके 1।54 हेक्टेयर कृषि भूमि को 1।32 हेक्टेयर दर्ज कर दिया गया है।
उनका कहना है कि उनके धान फसल की कटाई हो चुकी है मगर धान बेचने के लिए वे रकबे में त्रुटि सुधार का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि सुधार के बाद जो सूची आई है, उसमें भी धान के रकबे में हुई त्रुटि अब तक नहीं सुधरी है। उन्होंने बताया कि उनके गांव के कृषक थनोद सहकारी समिति में धान विक्रय करते हैं जहां ऐसे प्रभावित कृषक त्रुटि सुधार के बाद नई सूची पहुंचने की आस में बार-बार सोसाइटी का चक्कर काट रहे हैं। समिति के अध्यक्ष बृजमोहन देशमुख का कहना है कि धीरे धीरे किसानों के रकबा में हुई त्रुटी में सुधार हो रहा है। अभी भी कुछ किसानों के रकबा में त्रुटि सुधार बाकी है।


